Serbia Election Results: `मैं दिन में 20 घंटे काम करता हूँ मैं सोता नहीं हूँ विदेशी ताकतें और देश के गद्दार मुझे मारना चाहते हैं. क्योंकि मैं सर्बिया को झुकने नहीं दे रहा.

ऐसे जज्बाती भाषण अक्सर सर्बिया के पूर्व प्रधानमन्त्री और मौजूदा राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक भी दिया करते थे. जिन्हें आज के चुनावी नतीजों में छात्रों की पार्टी स्टूडेंट लिस्ट ने चलता कर दिया है. सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड सहित पूरे देश में जश्न का सा माहौल है. वजह 14 साल बाद उन्हें एक अडियल, रूढ़िवादी, चर्चवादी और ड्रामेबाज नेता के ( कु ) शासन से मुक्ति मिली है.

पर यह आसान नहीं था, इसके लिए सर्बिया के छात्रो ने दो साल लम्बी लड़ाई लड़ी व चुनाव की अपनी मांग पूरी करवाई. और आज यह साबित भी कर दिया कि यूरोप हो या एशिया सर्बिया हो या भारत आख़िरकार जीत लोकतंत्र की ही होनी है. यदि आप सर्बिया के छात्र आंदोलन की विस्तार से जानकारी चाहते हैं तो 23 अक्तूबर को इसी वेब साईट पर प्रकशित लेख `सर्बिया के नतीजे बताएँगे कि योगेंद्र यादव गलत क्या कह रहे हैं` पढ़ें.

पहली बार चुनावी मैदान में उतरी स्टूडेंट लिस्ट ने कड़े और नजदीकी करार दिए जाने बाले मुकाबले में वुसिक की एसपीपी यानी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी को एकतरफा पटखनी दी. 250 सीटों बाली संसद में स्टूडेंट लिस्ट को 138 और एसपीपी को महज 104 सीटें मिली, बाकी 8 सीटें छोटे दल ले गए. एसपीएस को केवल 32.3 फीसदी वोटों से तसल्ली करना पड़ी जबकि स्टूडेंट लिस्ट को 52 फीसदी वोट मिले.

नतीजे देख दुनिया भर के सियासी पंडित हैरान हैं. वजह जगह जगह जिनमे से अधिकतर दक्षिणपंथियों की हुकुमत है में छात्र और आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर बबाल काट रहे हैं. फ़्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूली अव्यवस्था को लेकर फिर हिंसा हो रही है तो भारत भी इससे अछूता नहीं हैं. जहाँ कांग्रेस सहित इंडिया ब्लाक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर महीने भर से सड़कों पर हैं. राहुल गाँधी के उठाए वोट चोरी के मुद्दे को तूल देने बाली सीजेपी भी उनके साथ है.

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