कायदे से तो इस पर लिखा तो करारा व्यंग चाहिए लेकिन दिलचस्पी और हैरानी की तमाम हदें लांघती यह खबर थी कि चीफ जस्टिस औफ इंडिया रंजन गोगोई अपने कार्यकाल के दौरान ही तिरुपति मंदिर पहुंचे थे. वहां उन्होंने सपत्नीक वेंकेटेश्वर के दर्शन किए. हालांकि फोटोग्राफरों का माहौल देखकर लग ऐसा रहा था कि वे दर्शन करने नहीं बल्कि देने पहुंचे थे एक व्यक्ति विशेष से परे देखें तो लोग किसी भी मंदिर में करने नहीं बल्कि दर्शन देने ही जाते हैं क्योंकि पत्थर की मूर्ति तो बेचारी कहीं जाना तो दूर अपनी जगह से हिल भी नहीं सकती इसलिए भगवान जिसे चाहे उसे दर्शनों के लिए बुला लेता है और कहा भी यही जाता है.

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