केंद्र हो या राज्य सरकारें आज की तारीख में सभी के लिए बोझ बन गए हैं सरकारी कर्मचारी.ज्यादातर राज्य सरकारों ने इस लॉकडाउन की स्थिति में भी अगर शराब की दुकानों या ठेकों को खोलने का फैसला किया है तो इसलिए क्योंकि इनकी वित्तीय हालत बहुत खस्ता है और इस खस्ता वितीय हालत का सबसे बड़ा कारण है सरकारी कर्मचारियों का भारीभरकम बोझ.देश का कोई भी ऐसा राज्य नहीं है ,जिसके कुल राजस्व का 70-80 फीसदी अपने कर्मचारियों के वेतन,भत्ते और पेंशन देने में न खत्म हो जाता हो.यही वजह है कि विकास के नाम पर सरकारें केवल इधर से उधर टोपियां घुमाते रहते हैं.सच बात यह है कि सरकारों पर अपने कर्चारियों की तनख्वाहों का इतना बोझ होता है कि वे किसी दूसरे काम पर फोकस ही नहीं कर पातीं.क्योंकि जरूरी फंड ही नहीं होता.

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