तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में शुरुआती गहमागहमी के बाद पसरते सन्नाटे से सभी प्रमुख राजनैतिक दल और नेता सकते में हैं कि मतदाता चुनाव में उम्मीद के मुताबिक दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहा है. वोटर्स को लुभाने में जुटे नेता अपनी तरफ से पूरा जोर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही है तो इसकी अपनी वजहें भी हैं कि लोग सभी दलों से नाउम्मीद हो चुके हैं. मतदाता की यह उदासीनता और खामोशी अगर किसी बड़े तूफान का इशारा है तो भाजपा को सत्ता मुट्ठी में बनाए रखने ज्यादा कोशिशें करना पड़ रहीं हैं जो इस खामोशी का मतलब समझ रही है कि लोग उसे लेकर खुश नहीं हैं.

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