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कानूनी पचड़े में फंसे नवाजुद्दीन सिद्दिकी

चौदह वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद अब जब नवाजुद्दीन सिद्दिकी का करियर पटरी पर दौड़ रहा है, तो वह अपनी हरकतों से खुद को विवादों के साथ साथ कानूनी पचड़ो में भी फंसाते जा रहे हैं. वास्तव में नवाजुद्दीन सिद्दिकी अपनी आत्मकथा ‘‘एक आर्डिनरी लाइफःए मैमोर’’ लेकर आ रहे हैं.

यूं तो यह पूरी किताब दो नवंबर 2017 को बाजार में आएगी. लेकिन इस आत्मकथा के कुछ अंश मुंबई के एक अंग्रेजी अखबार में जब से छपे हैं, तब से नवाजुद्दीन सिद्दिकी पर कुछ अभिनेत्रियों ने झूठा और सिम्पैथी बटोरने के लिए किसी भी हद तक जा सकने वाला बताते हुए कई तरह के आरोप लगाए हैं. यह वह अभिनेत्रियां हैं,जिनके साथ रिश्तों की बात अपनी किताब में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने लिखी है.

नवाजुद्दीन सिद्दिकी की किताब के कुछ पन्ने बाहर आने के बाद सबसे पहले फिल्म ‘‘मिस लवली’’ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी की सह कलाकार रही अभिनेत्री निहरिका सिंह ने हमला बोला. निहारिका ने नवाज को छोड़ने की वजह बताते हुए कहा है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी पहले से ही शादीशुदा थे.

उनकी पत्नी गांव में थी, पर इस बात को नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने उनसे छिपायी थी. इसके अलावा वह एक अमरीकन लड़की के साथ भी प्यार की पेंगें बढ़ा रहे थे. निहारिका सिंह ने लगभग चार दिन पहले नवाजुद्दीन सिद्दिकी के खिलाफ कानूनी कारवाही करने की बात कही थी. वह तो अभी तक आगे नही बढ़ी.

मगर नवाजुद्दीन सिद्दिकी अपनी आत्मकथा और निहारिका सिंह के साथ रिश्तों को लेकर जो कुछ लिखा, उसकी वजह से कानूनी पचडे़ं में फंसते नजर आ रहे हैं. इसकी वजह यह है कि दिल्ली के एक वकील गौतम गुलाटी ने ‘‘राष्ट्रीय महिला आयोग’’के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए नवाजुद्दीन सिद्दिकी के खिलाफ आई पी सी की धारा 376 यानी कि बलात्कार, धारा 497 यानी कि व्याभिचार और आईपीसी की धरा 509 यानी कि स्त्री की लज्जा का अनादर करना, के तहत एफआरआई दर्ज कराने की भी मांग की है.

गौतम गुलाटी ने अपनी शिकायत में लिखा है कि निहारिका सिंह के साथ प्रेम संबंध व रिश्ता रखने के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दिकी शादीशुदा थे और यह बात उन्होने निहारिका सिंह से छिपायी थी.

मजेदार बात यह है कि एडवोकेट गौतम गुलाटी का दावा है कि वह आज तक निहारिका सिंह से नहीं मिले, पर जो कुछ छपा है, उस आधार पर उन्होंने यह शिकायत दर्ज करायी है.

उधर ‘‘राष्ट्रीय महिला आयोग’’ से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अपनी शिकायत में एडवोकेट गौतम गुलाटी ने लिखा है-‘‘अभिनेता ने अपनी किताब में जो कुछ लिखा है, उसे लिखते समय उसने इस पर विचार ही नहीं किया कि इससे किसी शादीशुदा महिला की जिंदगी बर्बाद हो सकती है. महज सस्ती शोहरत बटोरने व किताब से पैसा कमाने के लिए नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने स्त्री की लज्जा का अनादर किया है.’’

सूत्रों की माने तो इस पर ‘‘राष्ट्रीय महिला आयोग’’ सक्रिय हो गया है. और वह इस पर सुनवाई करने के लिए नवाजुद्दीन सिद्दिकी को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है.

तो क्या अब तक नवाजुद्दीन सिद्दिकी पत्रकारों से भी झूठ बोलते आए हैं?

नवाजुद्दीन सिद्दिकी की आत्मकथा ‘‘एन आर्डिनरी लाइफ:ए मैमोर’’ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने लिखा है कि वह मुंबई से सटे उपनगर मीरा रोड में रहा करते थे, और वह अक्सर मीरा रोड रेलवे स्टेशन पर सुनीता राजवार से मिला करते थे. जबकि 26 मई 2012 को हमसे बात करते हुए नवाज ने जो कुछ कहा था, वह उनकी किताब में लिखी बात से विपरीत है.

जी हां ! मई 2012 में जब नवाजुद्दीन सिद्दकी से हमारी मुलाकात हुई थी और हमने उनसे पूछा था कि, ‘फिल्मों में छोटे छोटे किरदार निभाते हुए मुंबई में दस साल कैसे गुजर बसर की?

इस पर नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने कहा था-‘‘उन दिनों की याद मत दिलाइए. सुबह यदि मैं कुछ खा लेता था, तो मुझे यह नहीं पता होता था कि मुझे रात में खाना मिलेगा या नहीं. कई बार मैं पांच से छह किलोमीटर पैदल चल कर अपने दोस्त के घर पर रात का खाना खाने जाया करता था.

उन दिनों मैं गोरेगांव में अपने चार दोस्तों के साथ एक कमरे में रहता था. जिसका किराया हजार रूपए था, मेरे हिस्से ढाई सौ रूपए आते थे. और कई बार ऐसा होता था कि मैं यह ढाई सौ रूपए भी नही दे पाता था. पर‘ब्लैक फ्रायडे’ से मेरे लिए दरवाजे खुल गए. उसके बाद मैंने फिल्म ‘फिराक’ में बहुत बड़ा किरदार निभाया, लेकिन फिल्म ‘फिराक’ को किसी ने देखा ही नहीं.’’

उन्होने आगे कहा था- शुरूआती दिनों में तो छोटे छोटे निर्देशकों ने भी मुझे कठपुतली बनाकर रख दिया था. सभी यही कहते थे कि ‘कुछ करके दिखाओ, तब जानूं’. मैंने टीवी पर हाथ आजमाया, पर वहां भी वही हालत थी. टीवी क्वीन एकता कपूर अपने सीरियलों में छोटे छोटे किरदारों के लिए भी सिर्फ सुंदर चेहरों को ही पेश कर रही थी.

वहां अभिनय की बजाय सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही मायने रखती थी. मेरी कोई जगह ही नही थी. इसी के चलते मैं ‘सरफरोश’ और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ में एक एक सीन करने के लिए मजबूर हुआ. कोई भी फिल्मकार मुझे दो सीन वाला किरदार देना ही नही चाहता था.’’

जब हमने उनसे पूछा था कि, ‘जब आप मुंबई आए स्ट्रगल कर रहे थे. काम नहीं मिल रहा था, तो आपको फ्रस्ट्रेशन नहीं हुआ. या आपने वापस अपने गांव जाने की नही सोची?

इस सवाल पर नवाज ने कहा था-‘‘मैं वापस गांव नहीं जा सकता था. क्योंकि यदि मैं गांव वापस जाता, तो वहां मैं लोगों के बीच मजाक का केंद्र बन जाता. फिर मुझे अपनी मां की कही हुई बात याद आती थी. मेरी मां कहती थी कि ‘बारह साल में कचड़े की जगह बदल जाती है. ’तो मुझे यह उम्मीद थी कि कभी न कभी मेरा भाग्य भी बदलेगा.

अब देखिए,12 साल पूरे होते होते हर तरफ मेरी ही चर्चा हो रही है. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मुझे सराहा जा रहा हैं. बार बार असफलता मिलते तथा रिजेक्शन पर रिजेक्शन झेलते हुए मुझे भी फ्रस्ट्रेशन होने लगा था. लेकिन धीरे धीरे मुझे आदत सी पड़ गयी. यदि यह आदत नहीं पड़ती तो आज मैं जहां पहुंच पाया हूं वहां पहुंच भी नहीं पाता.’’

मेरे इस सवाल पर कि, अब उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आया हैं?

इस पर नवाज ने कहा था-‘‘मुंबई पहुंचते ही मुझे सफलता मिल गयी होती, तो शायद मेरी जिंदगी बदल गयी होती. पर दस साल जिस तरह से मैनें संघर्ष किया हैं, उससे जिंदगी नहीं बदलने वाली. ’’तो फिर किताब में उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसे क्या माना जाए?

इतना ही नहीं अभिनेत्री सुनीता राजवार का दावा है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी गरीब नही थे. बल्कि खुद सुनीता राजवार अपने दोस्त के साथ रहते हुए संघर्ष कर रही थी.

अब सवाल यह है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने जो कुछ किताब में लिखा है, उसे सच माना जाए या जो कुछ उन्होने हमसे कहा था, उसे सच माना जाए? या सुनीता राजवार की बात को सच माना जाए?

यामाहा ने लौंच की तीन पहियों वाली ये शानदार सुपरबाइक

यामाहा ने टोक्यो में आयोजित 45वें मोटर शो में अपनी 3 पहियों वाली सुपरबाइक पेश की है. इस बाइक का नाम यामाहा निकेन है और यह बाइक एमटी-09 पर आधारित है. हालांकि, यामहा ने निकेन की बहुत ज्यादा जानकारी इस मोटर शो में मुहैया नहीं कराई है.

उम्मीद की जा रही है कि 6 नवंबर को इटली के मिलान में होने वाले ईआईसीएमए शो में कंपनी इस बाइक की और भी ज्यादा जानकारी देगी. पिछले टोक्यो मोटर शो के दौरान यामाहा ने MWT-9 कौन्सेप्ट पेश किया था जिसका फ्रंट-एंड इस बाइक से काफी मिलता-जुलता है लेकिन बाकी हिस्से में नाटकीय अंदाज में बदलाव किए गए हैं.

निकोन के संबंध में सबसे ज्यादा चर्चा उसके अग्रेसिव और आकर्षक फ्रंट एंड की हो रही है. इसका सस्पेंशन पूरी तरह से एडजस्टेबल है. फ्रंट एंड के अलावा, एक और फीचर पर चर्चा हो रही है – वह है तिहरा पेट्रोल इंजन, तीन पहिया और तीन सिलेंडर.

3 पहियों वाली ये स्पोर्ट्स बाइक LMW टेक्नोलौजी पर काम करती है. LMW यानी लीनिंग मल्टी व्हील टेक्नोलौजी से बाइक को बेहतरीन ग्रिप मिलती है. हाई स्पीड में भी बाइक को मोड़ने पर भी बैलेंस नहीं बिगड़ता.

इस बाइक के फ्रंट में दो व्हील और एक रियर व्हील है. फ्रंट के दो पहिये 15 इंच के हैं. हालांकि, तीन पहियों वाली बाइक का कौन्सेप्ट पहले बार सामने नहीं आया है. इससे पहले भी यह नजर आता रहा है लेकिन निकेन में दिया गया लीन फंक्शन इसे खास बनाता है.

यामाहा निकेन में लिक्विड-कूल्ड, फ्यूल-इंजैक्टेड, फोर-स्ट्रोक, डीओएचसी, फोर-वॉल्व, इन-लाइन ट्रिपल इंजन दिया गया है. तीन-सिलेंडर वाले इस इंजन का पावर 847 सीसी है जो यामाहा एमटी-09 से लिया गया है. यामाहा ने बताया कि यह ज्यादा डिस्प्लेसमेंट वाली मल्टी-व्हीलर बाइक है जिसमें लिक्विड-कूल्ड इंजन लगाया गया है.  कंपनी ने बाइक के डायमेंशन की जानकारी दी है जिसमें इसकी लंबाई 2150mm है , चौड़ाई 885mm और उंचाई 1250mm है. इसके साथ ही बाइक में ट्रिपल सिलेंडर इंजन दिया गया है.

अब रिकौर्ड करें अपने मनचाहे वीडियो कौल, ये है तरीका

अगर फेसबुक मैसेंजर या व्हौट्सएप पर वीडियो कौल आए और उसे रिकौर्ड करने की जरूरत पड़े तो कैसे करेंगे. ऐसी समस्या से बचने के लिए भी एक खास तरीका है जिसकी मदद से वीडियो कौल को रिकौर्ड किया जा सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

गूगल प्लेस्टोर पर ढेरों एप्लीकेशन मौजूद हैं जो स्क्रीन रिकौर्ड करने का फीचर देते हैं. ऐसा ही एक एप DU Recorder है. इसे डाउनलोड करें. इसके बाद स्क्रीन पर एक पौप टाइप का आइकन दिखेगा. एप के आइकन पर क्लिक करने पर यूजर को स्क्रीन रिकौर्ड करने और पौज करने का विकल्प मिलेगा.

इस एप्लीकेशन की मदद से आप वीडियो के साथ औडियो भी रिकौर्ड कर सकते हैं, जो यूजर के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है. एप की मदद से व्हौट्सएप या फेसबुक मैसेंजर पर वीडियो कौल आने पर रिकौर्डर को औन कर दें. इसके बाद वह वीडियो कौल अपने आप रिकौर्ड हो जाएगी.

ए जेड स्क्रीन रिकौर्डर एप

स्क्रीन रिकौर्डर के लिए Screen Recorder  एप की मदद ले सकते हैं. इस एप में भी आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. इसमें भी स्क्रीन पर दिख रहे आइकन पर क्लिक करना और वीडियो रिकौर्ड करना है.

इस एप को इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है. इसे शुरू करने के बाद आप स्क्रीन के केंद्र में चार आइकन रिकौर्डिंग प्रारम्भ करने के लिए एप सेटिंग का समायोजन करने के लिए आपके रिकौर्डेड वीडियो का फोल्डर एक्सेस करने के लिए और बाहर जाने के लिए विकल्प दिखाई देंगे.

इसकी सेटिंग से आप वीडियो आउटपुट की गुणवत्ता चुन सकते हैं या रिकौर्डिंग के दौरान की गई बातचीत को देख सकते हैं. एक बार जब यह रिकार्ड करना प्रारम्भ करता है तो स्क्रीन के निचले दाहिने कोने में एक लाल बिंदु दिखाई देने लगता है.

स्क्रीन रिकौर्डर विद औडियो एडिटर का कमाल

यह एप स्क्रीन रिकौर्डर के साथ सामने वाले कैमरे की मदद से वीडियो को भी मिलाने की शक्ति रखता है. यह रिकौर्डिंग को फोन की इंटरनल मेमोरी में सेव करता है. गौर करने वाली बात यह है कि इसके लिए किसी भी तरह के लौगइन की जरूरत नहीं होती है.

इस एप से वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफौर्म पर दोस्तों के साथ साझा भी कर सकते हैं. अगर यूजर फोन में किसी खास ट्रिक के बारे में अपने संबंधियों को बताना चाहते हैं तो यह एप आपके लिए बेहद ही उपयोगी साबित हो सकता है. यह एप गूगल प्लस्टोर पर Screen Recorder With Audio And Editor & Screenshot नाम से मौजूद है.

हाईकोर्ट ने सैक्स को दी है एक नई व सही परिभाषा

हिंदी फिल्म ‘पीपली लाइव’ के निर्देशक महमूद फारूकी को अंतत: डेढ़ साल की जेल के बाद अपनी एक महिला मित्र के ही बलात्कार के आरोप से मुक्ति मिल गई. 35 वर्षीय अमेरिकी महिला, जो महमूद और उस की पत्नी अनुजा रिजवी की मित्र थी और उन के घर पर खाना भी खाती थी तथा देर रात तक रुकती भी थी, ने आरोप लगाया था कि उस दिन महमूद ने उस के साथ जबरदस्ती की थी. उस के कपड़े उतार कर उस से ओरल सैक्स किया था.

लोअर अदालत ने महमूद को 7 साल की सजा दी थी पर उच्च न्यायालय ने फैसला बदलते हुए कहा है कि यह सहमति का मामला है और अगर औरत ने धीमे से ‘न’ कहा भी था तो यह पक्का करना असंभव है कि यह आमंत्रण था या इनकार. इस संदेह पर महमूद को रिहा कर दिया गया है.

परिचितों में सैक्स को बलात्कार कहने का जो नया तौरतरीका महिलाओं ने अपनाया है यह सैक्स स्वतंत्रता को कुचल देगा. यदि किसी आदमी या औरत में इतना आकर्षण नहीं है कि वह मौका मिलने पर चाहत न पैदा कर सके और दूसरे के प्रति उदासीन रहे, तो यह प्रकृति के विरुद्ध कहा जाएगा.

बलात्कार बुरा है पर सैक्स उस में चाहे एक तरफ से थोड़ी जबरदस्ती भी हो वास्तव में एकदूसरे के प्रति स्वाभाविक आकर्षण का रूप है और मित्रता को सीमेंट करती है चाहे मित्रता पतिपत्नी के बीच हो या फिर गैर के साथ.

बिना सैक्स के स्त्रीपुरुष मित्रता असल में 2 स्त्रियों और 2 पुरुषों की मित्रता से भी कमजोर होती है. स्त्रीपुरुष मित्रता में एकदूसरे पर न धौंस जमा सकते हैं न मजाक कर सकते हैं. जिन्हें सैक्स रहित मित्रता चाहिए उन्हें दूसरे पुरुष या दूसरी स्त्री से मिलना ही नहीं चाहिए और केवल व्यावहारिक संबंध रखने चाहिए.

पुरुष को सैक्स चाहिए पर वह उसे आनंद तब ही देता है जब मित्रता की चाशनी में डूबा हो. बाजारू औरतों से खरीदे सैक्स में कभी किसी को आनंद नहीं आया है और इसीलिए सभी वेश्यालयों में नाच अवश्य होता है, क्योंकि तभी ग्राहकों को रोका जा सकता है.

उच्च न्यायालय ने सैक्स को एक सही व नई परिभाषा दी है. स्त्रीपुरुष संबंधों को हर समय नैतिकता या जोरजबरदस्ती की निगाहों से नहीं देखा जाना चाहिए. विवाहपूर्व या विवाह बाद दोस्तों में सैक्स के बहुत जोखिम हैं पर जो जोखिम में आनंद पाते हैं उन्हें सहमति होने पर रोकने का अधिकार किसी को नहीं है. आकर्षण पैदा होने पर, 4 कदम चल जाने के बाद कई बार संबंध बन जाने के बाद बलात्कार का आरोप लगाने का जो हथियार दुनिया भर में महिलाएं अपना रही हैं यह उन की कार्यक्षेत्र में ऐंट्री धीमे होने का एक कारण है.

अब पुरुष महिलाओं को हमराज बनाने से कतरा रहे हैं और उन्हें दूरदूर रख रहे हैं. पुरुषों की आपसी मित्रता ज्यादा पकने लगी है जैसे ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ या ‘थ्री ईडियट्स’ में दिखाया गया है.

निराश होने की बजाय एक नजर खुद पर डाल कर तो देखें

ललिता पार्टी आदि में जाने के लिए पूरे उत्साह से तैयार होती है. कई दिनों पहले से उस की शौपिंग शुरू हो जाती है. मगर पार्टी से लौटने पर उस का कई दिनों तक मूड औफ रहता है. कारण किसी दूसरी महिला का उस से ज्यादा सजासंवरा होना. तब वह कभी अपने पति नीलेश को कम पैसे देने के लिए उलाहने देती है, तो कभी किसी और को दोष देती है. उस के इस रवैए से उस का पति नीलेश क्या पूरा घर परेशान होता है.

किसी को अपने से बेहतर सजासंवरा देख हीनभावना या जलन से ग्रस्त हो उस की तारीफ करनी तो दूर वह उस से कुछ सीखना भी नहीं चाहती.

जिस के पास जो गुण है, हुनर है उसे सीखने की कोशिश करने में कोई शर्म या संकोच नहीं करना चाहिए. यदि मन में हीनभाव आते दिखें, तो ऐसे में अपने भीतर की उमंग, उत्साह को कम न होने दें. मन में उदासी को बिलकुल जगह न दें, क्योंकि आप के पास भी बहुत कुछ अच्छा है. बस जरूरत है खुद पर नजर डालने की. मसलन:

आप में आत्मविश्वास है: आप ने अपनेआप को पार्टी के लिए तैयार किया है तो अपनी बुद्घि से सही ही किया है. फिर उदासी किस बात की? अपनाअपना अंदाज है अपना प्रस्तुतिकरण है. किसी से तुलना कैसी? अपने व्यक्तित्व पर जो जंचता है उसी के अनुरूप तैयारी की है आप ने.

आप के पास कौमनसैंस है: आप अवसर के अनुसार तैयार हैं. मौका, माहौल सब देख कर तैयार हुई हैं, क्योंकि कौमनसैंस है आप में. अवसर के अनुसार कपड़े, कपड़ों के अनुसार जेवर, मेकअप, घड़ी, सैंडल, नीचे से ऊपर तक आप एक लय में तैयार हुई हैं. इस बात से खुश हों.

आप ने तैयारी में ज्यादा समय, पैसा बरबाद नहीं किया: आप को खुश होना चाहिए कि आप ने वक्त और पैसे दोनों की फुजूलखर्ची से खुद को बचा लिया. खुशनुमा चेहरे की कीमती अंदरूनी मुसकान बनाए रखें. यकीन मानिए उस से बड़ी सजावट और कोई नहीं. उस की चमक के आगे सब फीका है.

आप के होस्ट और अन्य गैस्ट से मधुर संबंध: इस बात पर गौर करें कि आप जिन के यहां खुशी में शामिल होने आई हैं, उन से आप के कितने अच्छे संबंध हैं. वे सिर्फ आप के हैं. खुश रह कर उत्साहपूर्वक उन की खुशी में शामिल होना ही आप का प्रथम कर्तव्य है. ऐसे विचार मन में लाते ही हीनभावना अगर होती भी हो तो वह झट से जाती रहेगी.

बेहतर की तारीफ करें उस से कुछ सीखें: दिल से प्रशंसा तथा नजरों से टिप्स लेने का प्रयास दोनों आप के बेहतर बनने में उपयोगी सिद्ध होंगे. अवसर मिले तो एक बार बोल कर भी तारीफ करें. दूसरों से ज्ञान लेने से गुरेज न करें. गुण सीखने से कोई छोटा नहीं होता अपितु बड़ा ही होगा.

आप में कई खूबियां है: किसी ने आप की आंखों को, बालों को, चेहरे को, चाल को, प्रतिभा को, हुनर को, दिमाग को, संस्कारों को, भाषा को या अंदाज को यों ही नहीं सराहा होगा. इस सराहना को याद रखें. खुद पर विश्वास रखें.

यह मान कर चलें कि सब का अपना आकर्षण है. मुसकराते हुए सलमान खान की फिल्म ‘सुलतान’ का यह गाना अपने पर बिलकुल फिट जानें ‘जग घूमया थारे जैसा न कोई…’

देखिए अभी खिलीखिली मुसकान आप के चेहरे पर आ गई, जो सब पर भारी है.

स्टाइलिश लुक पाना है, तो अपनाएं मेकअप का यह तरीका

फैशन की दुनिया में मेकअप के अलग ही अंदाज होते हैं. मैगजींस, फैशन रनवेज से ले कर फैशन इंडस्ट्री के लिए वीडियो प्रमोशंस तक हर जगह फैशन मेकअप आर्टिस्ट अपने जलवे बिखेरते हैं.

गृहशोभा के फेब सेमिनार में हेयर ऐंड मेकअप आर्टिस्ट शगुन गोयल ने फैशन मेकअप के बारे में विस्तार से बताया:

ऐसे करें शुरुआत

फैशन मेकअप करने के लिए सब से पहले त्वचा को वैट टिशू से साफ करें. फिर आंखों पर अंडरआई क्रीम लगाएं. इस के बाद स्किन से मैच करते फाउंडेशन की हलकी लेयर लगाएं ताकि आईबौल्स स्किनटोन में आ जाएं और मनपसंद कलर अच्छी तरह निखर कर आए. आईशैडो ज्यादा देर तक टिके इस के लिए फाउंडेशन के ऊपर ट्रांसल्यूशन पाउडर का इस्तेमाल करें.

आंखों को मनपसंद शेप देने के लिए कपड़ों से मैच करते रंग ले कर एक आईशेप तैयार करें. आईशेप तैयार करने के बाद आईलैशेज, आईलाइनर और मसकारा लगाएं.

पूरे चेहरे व गरदन पर विटामिन ई क्रीम लगा कर त्वचा को अच्छी तरह मौइश्चराइज करें. स्किन से मैच करता फाउंडेशन लगाएं और ऊपर से कौंपैक्ट लगा कर स्किन तैयार कर लें.

डार्क ब्राउन कलर का प्रयोग करते हुए फेस कंटूरिंग करें. इस तरह चेहरे को ओवल शेप देने के बाद गालों पर सौफ्ट पीच कलर का ब्लशर लगा कर खूबसूरती उभारें. आकर्षण बढ़ाने के लिए हाईलाइटर का प्रयोग करें.

हाई डैफिनेशन फैशन मेकअप 

हाई डैफिनेशन मेकअप ब्राइडल और पार्टीज में काफी प्रचलित है. इस मेकअप में थोड़े सौफ्ट कलर यूज करते हुए हेयरस्टाइल बोल्ड रखा जाता है.

सब से पहले स्किन को वैट टिशू से साफ करें फिर आंखों पर अंडरआई क्रीम लगाएं. इस के ऊपर स्किन से मैच करते फाउंडेशन का इस्तेमाल करें. फाउंडेशन लगाते समय लाफिंग लाइन्स, आई कौर्नर्स और लिप कौर्नर्स पर खास ध्यान रखें. ओपन पोर्स को अच्छी तरह फिल करें. अब ट्रांसल्यूशन पाउडर लगा कर स्किन को एकसार कर लें.

लिप मेकअप

2 रंगों जैसे ब्लू और फीरोजी का इस्तेमाल करते हुए लिप शेप तैयार करें. फैशन मेकअप में डार्क कलर की लिपस्टिक अच्छी लगती है. मेकअप लंबे समय तक टिके इस के लिए मेकअप फिक्सर का इस्तेमाल करें. मौडल लुक के हिसाब से हेयरस्टाइल बना कर मेकअप कंप्लीट करें.

आई मेकअप

आंखों को मनपसंद शेप देने के लिए कपड़ों से मैच करते कलर्स का प्रयोग करें. फिर लाइनर और काजल से इन्हें और आकर्षक लुक दें. चेहरे पर फेस प्राइमर लगा कर सिलिकोन फाउंडेशन का इस्तेमाल करें ताकि मेकअप अधिक समय तक टिके.

हाई डैफिनेशन ब्राइडल मेकअप में चेहरे के दागधब्बे, डार्क सर्कल्स वगैरह अच्छी तरह छिपा दिए जाते हैं ताकि ओवर मेकअप लुक न लगे. साधारण मेकअप से ही चेहरा आकर्षक व चमकदार दिखाई दे.

इस मेकअप में कौंपैक्ट की जगह ट्रांसल्यूशन पाउडर का इस्तेमाल करते हैं. आंखों को ऐक्स्ट्रा शाइन देने के लिए ग्लिटर का इस्तेमाल करें. इस मेकअप में लिपस्टिक के शेड्स पिंक, रैड, पीच, निओन जैसे कलर्स में होने चाहिए.

ओपन हेयरस्टाइल

इस फेब सेमिनार में ऐक्सपर्ट शगुन ने एक खास तरह के हेयरस्टाइल के बारे में भी बताया. इस ओपन हेयरस्टाइल के जरीए आप चेहरे की शेप चेंज किए बिना मेकअप कर भी आकर्षक लग सकती हैं.

सब से पहले बालों को थोड़ा सौफ्ट व शाइनी लुक दें. फिर इयर टु इयर शेप में कौंब व स्प्रे की मदद से बैककौंबिंग कर के पफ तैयार करें. बैक से बचे बालों की 2 पोनी बनाएं. अब आगे के जो 2 इंच बाल बचे हुए थे उन में से बारीक लेयर ले कर ऊपर की तरफ स्प्रे की सहायता से एक फायर लुक दें और फिनिशिंग के लिए शाइन स्पे्र का इस्तेमाल कर फिनिशिंग टच दें.

फैशन मेकअप एक कलरफुल मेकअप स्टाइल है. इसे अधिक आकर्षक लुक देने के लिए मनपसंद टैटूज भी बनवाए जा सकते हैं.

बालों को सेहतमंद बनाने के ये टिप्स आजमाएं, घने मुलायम बाल पाएं

खूबसूरत चमकते बालों की चाह हर महिला की होती है. ज्यादातर महिलाएं इस बात को ले कर परेशान रहती हैं कि बालों की खूबसूरती कैसे बरकरार रखी जाए. वैसे भी आज के समय में फैशन, प्रदूषण, तनाव और अस्वास्थ्यकर खानपान ने बालों के झड़ने, टूटने, सफेद होने जैसी समस्याएं बढ़ा दी हैं. ऐसे में जरूरी है कुछ बातों का खयाल रखा जाए ताकि आप के बाल किसी भी मौसम और उम्र में सेहमतंद व आकर्षक बने रहें.

अगर आप कभी बारिश में भीग जाती हैं तो घर पहुंचते ही बालों को धो लें. इस से सिर की त्वचा में संक्रमण होने की संभावना कम हो जाती है.

सिर की त्वचा गीली रहने से फंगल संक्रमण, रूसी और जूंए होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए बालों को साफ और सूखा रखने का प्रयास करें. गीले बालों के टूटनेझड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है. अत: बालों को धोने के तुरंत बाद कंघी का इस्तेमाल न करें. वे पूरी तरह सूख जाएं तभी कंघी करें.

घर से बाहर निकलते समय धूलमिट्टी, धूप या बारिश के पानी से बचने के लिए बालों को कवर कर के रखें. स्कार्फ, स्टोल या दुपट्टे से बालों को ढकें.

बाल को धोने से 1-2 घंटे पहले उन में हर्बल तेल लगाएं. इस से उन की कंडीशनिंग होगी. कुनकुने तेल से 15 मिनट मसाज करें. आप को रिलैक्स महसूस होगा और सिर की त्वचा में रक्तसंचार भी बढ़ेगा. बालों में भी नई चमक आएगी.

मौसम में बदलाव के दौरान सिर की त्वचा से प्राकृतिक नमी खो जाती है. इस से त्वचा पर मृत कोशिकाएं जमा होने लगती हैं जिस से रूसी और संक्रमण की स्थिति पैदा होती है और बाल झड़ने लगते हैं. इस स्थिति से बचने के लिए बालों को सूखा और साफ रखें.

ओजोन और्गेनिक एडवांटेज की मैडिकल कंसलटैंट डा. उमा सिंह कहती हैं कि हमेशा अपनी कंघी, हेयरब्रश और हेयर क्लिप्स साफ रखें. ब्लो ड्रायर या स्टाइलिंग का इस्तेमाल ज्यादा न करें. स्ट्रेटनिंग या कर्लिंग मशीन के ज्यादा प्रयोग से बचें, क्योंकि इस से बाल कमजोर हाते हैं.

बालों को निरंतर पोषण की जरूरत होती है. सही खनिज व विटामिन इन्हें लंबा और मजबूत बनाते हैं. इसलिए संतुलित आहार का सेवन करें, जिस में प्रोटीन, खनिजलवण व कैल्सियम की पर्याप्त मात्रा हो. विटामिन और आयरन भी बालों को स्वस्थ बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में फल और सलाद का सेवन करें. संतुलित भोजन, व्यायाम, कम तनाव, पर्याप्त नींद आप के बालों को स्वस्थ व चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं.

त्वचा की तरह बालों को भी पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए बादाम न सिर्फ दिमाग को तंदुरुस्त रखते हैं बल्कि बालों को भी पोषण देते हैं. इन में विटामिन ई पाया जाता है, जिस से बालों को मजबूती मिलती है. अत: हफ्ते में 1 दिन बादाम तेल से बालों की मालिश जरूर करें. बालों का झड़ना रुक जाएगा. इसी तरह शहद, आंवला वगैरह भी बालों के पोषण के लिए आवश्यक हैं. आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है जो बालों के विकास के लिए अच्छा होता है.

बालों को हर्बल शैंपू से धोने की आदत डालें. शैंपू करते वक्त निम्न बातों का खयाल रखें-

यदि बाल औयली हैं तो एक दिन छोड़ कर शैंपू करें.

नौर्मल बालों में सप्ताह में 2-3 बार शैंपू किया जा सकता है.

कर्ली बालों के लिए ड्राई हेयर शैंपू यूज करें.

स्कैल्प पर पोरों से शैंपू लगाएं. इस से बालों की गंदगी अच्छी तरह साफ होती है.

हसीन होती सैकेंड इनिंग, इसे पढ़कर आपको यकीन हो जाएगा

फैशन, मौडलिंग और ऐक्टिंग के लिए पहले महिलाओं की उम्र 20 से 30 साल तक ही परफैक्ट मानी जाती थी. लेकिन अब 35 साल के बाद की उम्र में भी महिलाएं खुद को किसी मौडल या ऐक्ट्रैस से कम नहीं समझतीं. मौका मिलने पर रुपहले परदे से ले कर रैंप शो, कैटवाक और मौडलिंग तक में वे सैकेंड इनिंग का खूब लुत्फ उठा रही हैं. बदलाव का असर बौलीवुड तक ही सीमित नहीं है, छोटे और बड़े शहरों की घरेलू महिलाएं भी इस चमक में पीछे नहीं हैं. इस कारण देश में ब्यूटी, फैशनेबल ड्रैस और वैलनैस का बिजनैस सब से आगे बढ़ रहा है.

बात केवल श्रीदेवी, हेमामालिनी, माधुरी दीक्षित, मलाइका अरोड़ा, काजोल, जूही चावला की ही नहीं है. छोटेबड़े शहरों में रहने वाली महिलाएं भी अब उम्र की दूसरी पारी में पहले से अधिक अच्छा काम कर रही हैं. फिटनैस और खूबसूरती के हिसाब से भी वे पहले से अधिक खूबसूरत और ग्लैमरस नजर आने लगी हैं. यही वजह है कि आज के दौर में छोटेबड़े सभी तरह के शहरों में ‘मिसेज’ को ले कर तमाम तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन होने लगा है. शादी के बाद महिलाओं की सक्रियता पहले दूसरे सामाजिक कार्यों में होती थी पर अब फैशन, ब्यूटी, रैंप शो और मौडलिंग में भी वे अपनी ब्यूटी और फिटनैस का कमाल दिखा रही हैं.

इस बारे में मिली जानकारी से पता चलता है कि शादी के बाद कैरियर, घरपरिवार, बच्चों का तनाव बहुत सारी आजादी में रुकावट बनता था. 35 की उम्र के बाद जब सारी चीजें करीबकरीब अपने हिसाब से चलने लगती हैं, तो मानसिक रूप से फ्रीनैस का अनुभव होता है. यही वजह है कि आज के समय में महिलाएं अपनी पहली पारी से ज्यादा सक्रिय दूसरी पारी में दिखने लगी हैं.

बात रैंप और ब्यूटी शो तक ही सीमित नहीं है. आज होटलों में होने वाली पार्टियों को देखें तो पता चलता है कि सब से अधिक पार्टियां इस तरह की महिलाओं के द्वारा ही की जाती हैं. ये ही आयोजक होती हैं और ये ही उन में हिस्सा भी लेती हैं. पहले किट्टी पार्टी केवल तंबोला खेलने तक सीमित होती थी. अब किट्टी पार्टी ग्लैमरस हो चुकी है. इस में थीम पार्टी का आयोजन होने लगा है. पार्टी का थीम कुछ इस तरह से रखा जा सकता है जहां महिलाएं अपनी फिटनैस और ब्यूटी को दिखा सकें. थीम पार्टी में पूल पार्टी भी होती है जहां महिलाओं को स्विमवियर पहन कर आना होता है. कभी स्कर्ट पहन कर आने की अलग थीम भी बनती है. थीम पार्टी में जब विजेताओं का चुनाव होता है तो यह देखा जाता है कि किस की स्कर्ट कितनी ऊपर थी, किस ने कैसा स्विमवियर पहना था.

फिटनैस का कमाल

महिलाओं में यह बदलाव फिटनैस के कारण आया है. फिटनैस के पैमाने को देखें तो पुरुषों से अधिक महिलाएं अपनी फिटनैस पर ध्यान देने लगी हैं. जिम से ले कर ब्यूटी पार्लर तक और स्किन स्पैशलिस्ट डाक्टरों से ले कर प्लास्टिक सर्जन तक ये महिलाएं चक्कर लगाने लगी हैं. इन की इसी सोच के कारण आज ब्यूटी और फिटनैस को बनाने में मदद करने वाले बिजनैस बढ़ रहे हैं. किसी भी महिला के शरीर में थोड़ा सा भी फैट बढ़ने से उस की परेशानी बढ़ जाती है. वह किसी भी तरह से अपने वजन को कम करने के प्रयास में जुट जाती है. श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मलाइका अरोड़ा, काजोल, जूही चावला जैसी महिलाएं इन की रोल मौडल होती हैं. इन्हें देख कर ये खुद को उन की तरह तैयार करने लगती हैं.

शादी के 20 साल के बाद मिसेज यूनिवर्स तक का सफर तय करने वाली रश्मि सचदेवा पहली नौन बौलीवुड सैलिब्रिटी बनीं जिन्हें कांस फिल्म फैस्टिवल में रैड कारपेट पर वाक करने का मौका मिला.

वे कहती हैं, ‘‘अगर हम खुद को पलट कर देखते हैं तो हमें एहसास होता है कि हम पहले से अधिक खूबसूरत लग रही हैं. यह फर्क हमारे अंदर आए आत्मविश्वास के कारण भी महसूस होता है. आज हम हर तरह की डिजाइनर ड्रैस पहन सकती हैं. हमें कभी नहीं लगता कि हम आज के समय में आई किसी मौडल से फिटनैस में पीछे हैं, जो ड्रैस वह पहन सकती है वही हम भी पहन सकती हैं. हमारे उस के साइज तक में कोई फर्क नहीं महसूस होता.

‘‘मैं पूरे भारत में अलगअलग जगहों पर सैलिब्रिटी बन कर गई हूं. हर जगह मैं ने वहां की महिलाओं के साथ बातचीत की. उन के विचार सुने तो पाया कि बदलाव घरघर पहुंच चुका है. भले ही वह महिला रैंप पर न हो पर वह अपने घर में पहले से अधिक सुंदर और फिट दिखने लगी है. इस की बहुत बड़ी वजह मीडिया खासकर महिलाओं के बीच पढ़ी जाने वाली पत्रिकाएं हैं, जिन के कारण यह बदलाव संभव हो सका है. घरघर फैली जागरूकता ने हर महिला की सैकेंड इनिंग को बहुत खूबसूरत बना दिया है. आज इन के चलते ही गारमैंट के बिजनैस में बदलाव आया है. वहां पर डिजाइनर इन्हें ध्यान में रख कर ड्रैस तैयार करने लगे हैं.’’

लुभा रही सैकेंड इनिंग

शादी के बाद कई सौंदर्य प्रतियोगिताओं को जीतने के बाद रिचा शर्मा ने फिल्मों में काम करना शुरू किया. वे उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की रहने वाली हैं और उन की शादी कोलकाता में हुई है. वहां शादी के कई साल बाद मिसेज इंडिया में हिस्सा लिया और जीतने के बाद मौडलिंग और ऐक्टिंग शुरू की. सनी लियोनी के साथ उन की हिंदी फिल्म ‘तेरा इंतजार’ आने वाली है. वे कहती हैं, ‘‘पहले शादी के बाद वाले कैरियर में मौडलिंग और ऐक्टिंग का औप्शन नहीं होता था. अब ये औप्शन भी खुलने लगे हैं. मैं ने जब मिसेज इंडिया में हिस्सा लिया था तब नहीं सोचा था कि ऐक्टिंग और मौडलिंग के औफर मिलेंगे. पर धीरेधीरे मुझे बहुत सारे औफर मिलने लगे. आज मैं कोलकाता कुछ समय रहती हूं. ज्यादा समय मुंबई रहना होता है. मुझे भी शादी और बच्चों के बाद अपने कैरियर की सैकेंड इनिंग अच्छी लग रही है. इस में परिवार का सहयोग बहुत माने रखता है.’’

मिसेज इंडिया में अपने हुनर का कमाल दिखाने वाली अर्चना प्रसाद कहती हैं, ‘‘आप को सुन कर आश्चर्य होगा कि जब मौडलिंग और ऐक्टिंग में लोगों की लाइफ खत्म होती है तब मेरी शुरू हुई. शादी और 2 बच्चों के बाद मैं ने मौडलिंग का कैरियर शुरू किया. जब मैं ने मिसेज इंडिया में हिस्सा लिया तो मेरा बेटा 15 साल का और बेटी 11 साल की थी. जिस ने भी सुना वह मजाक उड़ाता था. मेरे पति सरकारी अधिकारी थे. मुझे उन की गरिमा का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना था. जब मैं वहां जीत गई तो लोगों ने मजाक उड़ाना बंद कर दिया. यह सच है कि सफल होने के बाद हम अपने संघर्ष को याद नहीं रखते पर आज अच्छा लग रहा है. मुझे बाद में मौडलिंग के बहुत सारे औफर मिलने लगे. कई सीरियलों और ब्यूटी फिल्मों में काम किया.’’

अर्चना प्रसाद इंदौर में अपना ब्यूटी सैलून भी चला रही हैं. वे कहती हैं, ‘‘आज मैं गर्व से कहना चाहती हूं कि जो मैं ने हासिल करना चाहा वह सब किया, जिस की चाह हर लड़की या हाउसवाइफ को होती है. आज के दौर की सैकेंड इनिंग वाली महिलाएं मानती हैं कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती. बस सपनों को पूरा करने की हिम्मत होनी चाहिए. अब हर चीज संभव है. बदलाव का असर बहुत अच्छा है. यह आत्मविश्वास से भर देता है. पहले फिल्मों में शादी करते ही ऐक्ट्रैस का कैरियर खत्म हो जाता था अब शादी क्या बच्चा होने के बाद भी वह टीनऐजर सी पसंद की जाती है.’’

फिटनैस से ले कर सर्जरी तक

पहले कई तरह की परेशानियों के कारण महिलाएं फैशन के कैरियर में आने से हिचकती थीं. अब फिटनैस से ले कर सर्जरी तक ऐसे तमाम उपाय हैं, जिन से मनचाहा सौंदर्य हासिल किया जा सकता है. अब शरीर के किसी भी हिस्से में जमा फैट को हटाया जा सकता है जैसे हिप्स, ब्रैस्ट, वेस्ट और हाथ के पास का जमा फैट बौडी को सुडौल नहीं बनाता. इस को दूर किया जा सकता है. अंडर आर्म्स, लिप्स और आईब्रोज से ले कर स्माइल तक में करैक्शन की जाने लगी है. ऐसे में उम्र का असर खुद पर दिखाई ही नहीं देता. ज्यादातर महिलाओं को सैकेंड इनिंग में भी हिप्स, ब्रैस्ट, वेस्ट, अंडर आर्म्स, लिप्स या आईब्रोज जैसी चीजों को सही करने के लिए डाक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती. तमाम तरह की ऐक्सरसाइज से ही सब फिट हो जाता है.

सौंदर्य के क्षेत्र में काम करने वाले डाक्टरों का कहना है कि पहले शादी और खासकर मां बनने के बाद शरीर के कुछ अंगों का कसाव खत्म हो जाता था. अब फिटनैस और डाइट ऐक्सपर्ट की मदद से इस से बचा जा सकता है. अब शादी के बाद मां बनने के बाद महिलाएं अपने बच्चों को पूरी तरह से ब्रैस्ट फीडिंग भी कराती हैं और उस का असर भी नहीं दिखता है. यही नहीं शादी के बाद ब्रैस्ट और वेस्ट के हिस्सों में पड़ने वाले स्ट्रैच मार्क्स भी खत्म किए जाने लगे हैं. गर्भावस्था के दौरान भी ऐसे उपाय होने लगे हैं, जिस से स्ट्रैच मार्क्स कम से कम प्रभाव छोड़ सकें. ऐसे उपाय पहले महंगे और हर जगह उपलब्ध नहीं होते थे. अब ऐसा नहीं है. ये उपाय अब सस्ते और हर जगह उपलब्ध हैं.

फिगर का कमाल

बात केवल अधिक फैट की ही नहीं है अगर आप की ब्रैस्ट, हिप्स और वेस्ट सही अनुपात में नहीं है तो उस की बनावट को ठीक किया जा सकता है. छोटी ब्रैस्ट को सुडौल बनाया जा सकता है, जिस से रैंप और मौडलिंग के समय आप हर वह ड्रैस पहन सकती हैं जिसे कोई नई मौडल पहन सकती है. अंडरआर्म्स को ले कर एक हिचक शुरू से रहती है. अब इस को ले कर भी परेशान होने की जरूरत नहीं. अंडरआर्म्स के नीचे जमे फैट को कम किया जा सकता है और वहां की डार्कनैस को भी खत्म करना संभव हो गया है. शौर्ट ड्रैस ही नहीं घरेलू महिलाएं अब स्विमवियर भी पूरे आत्मविश्वास से पहनने लगी हैं. पहले के मुकाबले अब होटलों में ज्यादा स्विमिंगपूल हो गए हैं. यहां आने वालों में महिलाओं की संख्या सब से ज्यादा होती है, जिस से पता चलता है कि महिलाएं अपनी फिगर को ले कर कितनी सजग हैं.

मां बनने से कैरियर खत्म नहीं होता

दिन भर अपने क्लीनिक में मरीजों की तकलीफों से दोचार होती डैंटिस्ट डा. मेघना कहती हैं, ‘‘मेरी शादी 30 साल की उम्र में हो गई थी. उसी समय मैं ने अपना कैरियर शुरू किया था. वह समय मेरे लिए चुनौती भरा था, क्योंकि परिवार और कैरियर में तालमेल बना कर चलना मेरे लिए बहुत जरूरी था. इस के बाद जब बेटी हुई तो दिनचर्या थोड़ी डगमगाई. मैं भी आम महिलाओं की तरह फिटनैस के प्रति लापरवाह रहने लगी.

‘‘मगर फिर जल्द ही मैं ने खुद को संभाला और नियमित व्यायाम, मैडिटेशन करने लगी, जिस का फायदा मुझे अपने कैरियर में भी नजर आने लगा. मेरे पास कई मरीज ऐसे आते हैं, जो उम्र में मुझ से 10-12 साल छोटे हैं, लेकिन फिटनैस के चलते मैं उन से काफी छोटी लगती हूं. बेटी के आ जाने के बाद मेरा परिवार पूरा हो गया.

‘‘मां बनने के बाद मैं ने कभी यह महसूस नहीं किया कि मेरी उम्र 40 प्लस हो गई है, क्योंकि आज भी मैं खुद से प्रेम करती हूं. मैं ने बेटी की परवरिश में खुद को खोने नहीं दिया. आज सैकेंड इनिंग में भी मैं वही आत्मविश्वास और जोश महसूस करती हूं, जो शादी के पहले करती थी. शादी हो जाने और मां बन जाने पर किसी का कैरियर और ग्लैमर खत्म नहीं होता.’’

शहरों में तेजी से लेडीज जिम खुलने लगे हैं. यहां महिलाएं वर्कआउट कर के खुद को फिट रखती हैं. यह जरूरी नहीं कि हर महिला को रैंप वाक करना हो या उसे फिल्म, मौडलिंग में जाना हो. यह जरूर है कि आज वह अपने घरपरिवार का साथ देती है, बिजनैस संभालती है. ऐसे में वह भी पहले से अधिक फिट रहना पसंद करती है. आज के दौर में साड़ी और साधारण सलवारसूट रोज के चलन से बाहर हो गए हैं. अब महिलाएं डिजाइनर ड्रैस पसंद करने लगी हैं. सलवारसूट भी डिजाइनर होने लगे हैं.

फिटनैस आज की महिलाओं की सब से बड़ी जरूरत बन गई है. ऐसे में वे अपने जीवन की सैकेंड इनिंग में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं. सोशल मीडिया ने इस चलन को और भी आगे बढ़ाया है, जिस से महिलाएं अपनी फिगर और फिटनैस को ले कर ज्यादा अलर्ट रहने लगी हैं. इस से वे कोई समझौता नहीं करतीं.

बिहार : ताड़ी और नीरा के बीच लटकी ताड़ीबंदी

प्रदेश में ताड़ी पर रोक लगाने का मामला तुगलकी फरमान साबित हो कर रह गया है. पिछले साल अप्रैल महीने में सरकार ने बड़े ही तामझाम के साथ शराब के साथ ही ताड़ीबंदी का भी ऐलान किया था. सरकार ने दावा किया था कि नशीली ताड़ी पर रोक लगेगी और उस की जगह नीरा को बढ़ावा दिया जाएगा. नीरा को बेचने के लिए कई पौइंट भी बनाए गए और लाइसैंस भी बांटे गए.

18 मार्च, 2017 को नीरा नियमावली लागू की गई. नियमावली बनने के इतने महीने गुजरने के बाद भी हालत यह है कि ताड़ और खजूर से पैदा होने वाले कुल रस का एक फीसदी हिस्सा भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.

राज्य के 12 जिलों में ही कुल 74 फीसदी ताड़ और 70 फीसदी खजूर के पेड़ हैं. उन से रोजाना ताड़ और खजूर का 7 करोड़ लिटर रस जमा होना चाहिए था, पर महज 30 हजार लिटर रस ही जमा हो पा रहा है और उसी रस का नीरा बन रहा है. शाही मौसम यानी अप्रैल से अगस्त महीने के बीच ताड़ या खजूर के एक पेड़ से रोजाना 10 लिटर रस मिलता है. इस से साफ हो जाता है कि ताड़ और खजूर का 99 फीसदी रस या तो ताड़ी के रूप में बाजार में बिक रहा है या बरबाद हो रहा है.

उद्योग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, अभी नीरा बनाने और बेचने का काम टैस्टिंग के दौर से गुजर रहा है. फिलहाल तो नालंदा में नीरा की बौटलिंग हो रही है और एक सौ स्टालों पर इसे बेचा जा रहा है. सब से ज्यादा 55 स्टौल नालंदा में ही हैं. वैशाली में भी एक प्लांट लगाया जा रहा है. गया और भागलपुर में भी प्लांट लगाने की योजना को मंजूरी दे दी गई है, पर वहां अभी काम शुरू नहीं हो सका है.

एक प्लांट रोजाना 10 हजार लिटर नीरा को निखारता है. नालंदा के प्लांट पर 5 करोड़, 56 लाख रुपए और हाजीपुर के प्लांट पर 4 करोड़, 20 लाख रुपए खर्च किए गए हैं.

नीरा को 25 रुपए प्रति लिटर की दर से बेचना है और ताड़खजूर के गुड़ की कीमत 150 रुपए प्रति किलो तय की गई है. नीरा से जैम, पेड़ा, लड्डू, आइसक्रीम, जैली, हलवा बनाने की योजना है. इस के साथ ही ताड़ और खजूर के पत्तों से चटाई, खिलौने और झाड़ू बनाने की भी योजना है.

राज्य में सभी 38 जिलों में ताड़ और खजूर से रस उतारने के लिए 67 हजार, 280 लोगों को ट्रेंड किया गया है. सरकार उन्हीं 12 जिलों पर सब से ज्यादा नजर गड़ाए हुए है, जहां सब से ज्यादा ताड़ और खजूर के पेड़ हैं. ताड़ी की खपत के मामले में समूचे देश में बिहार चौथे नंबर पर है. पहले नंबर पर आंध्र प्रदेश, दूसरे नंबर पर असम और तीसरे नंबर पर झारखंड आता है.

ताड़ का पेड़

25 साल पुराना होने पर ही नीरा और ताड़ी दे सकता है. इस के बारे में कहा जाता है कि कोई ताड़ के पेड़ को लगाता है, तो उस का बेटा ही ताड़ी पी पाता है. ताड़ के पेड़ आमतौर पर 45 से 50 फुट ऊंचे होते हैं.

ताड़ी पर रोक लगाने से राज्य के 20 लाख पासी और ताड़ी के कारोबार से जुड़े परिवारों पर रोजीरोटी का संकट पैदा हो गया है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में पासी जाति की आबादी 8 लाख, 80 हजार, 738 है, जबकि साल 1991 की जनगणना में इस जाति की आबादी 5 लाख, 89 हजार, 12 थी.

ताड़ या खजूर के पेड़ से निकलने वाले रस को अगर सूरज उगने से पहले उतार लिया जाता है, तो उसे नीरा कहा जाता है और उस में नशा नहीं होता है, जबकि सूरज निकलने के बाद अगर रस को उतारा जाए, तो वही ताड़ी में बदल जाता है और वह काफी नशीला हो जाता है.

विरोधी दलों के नेताओं का मानना है कि ताड़ी पीने से कई फायदे होते हैं. उन का दावा है कि ताड़ी शराब नहीं, बल्कि जूस है. आंखों की रोशनी कम होने पर डाक्टर ताड़ी पीने की सलाह देते हैं.

गौरतलब है कि बिहार में देशी और विदेशी शराब के साथ ताड़ी पर भी पूरी तरह से पाबंदी है. राज्य में प्रति व्यक्ति प्रति सप्ताह ताड़ी की खपत 266 मिलीलिटर है.

बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि ताड़ी पर राजनीति करने वाले भरम फैला कर केवल अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं. सरकार को ताड़ी को पेड़ से उतारने और उस के कारोबार में लगे लोगों का पूरा खयाल है. सरकार ने ताड़ी पर रोक लगाई है, नीरा पर नहीं.

सुधा ब्रांड के बूथों पर नीरा की खरीदबिक्री हो रही है और इस के अलावा नीरा को बेचने के लिए कई पौइंट बनाए गए हैं. इस से इस धंधे में लगे लोगों का मुनाफा बढ़ जाएगा.  गौरतलब है कि साल 1991 में मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने ताड़ी से टैक्स और लाइसैंस फीस खत्म कर दी थी.

ताड़ी में नशा बढ़ाने के लिए उस में यूरिया और मैनड्रैक्स मिला दिया जाता है. इसे रोकने के लिए ही ताड़ी पर पाबंदी लगाई गई है. ताड़ के फल से जो रस निकलता है, वह हांड़ी (लबनी) में टपने के साथ ही फर्मंटेशन शुरू कर देता है, जिस से अलकोहल की मात्रा बढ़ने लगती है.

अगर हांड़ी में चूना डाल दिया जाए, तो फर्मंटेशन नहीं हो पाता है. फर्मलीन को भी हांड़ी में डाल देने से तकरीबन 40-45 घंटे तक फर्मंटेशन नहीं होता है. ताड़ी को मैडिसिनल भी माना जाता है. कहा जाता है कि इसे पीने से पेट साफ रहता है और पाचन संबंधी बीमारियां ठीक होती हैं. ताड़ी में चीनी की मात्रा ईख से कहीं ज्यादा होती है.

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