उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लोकसभा सदस्य हैं. अब उनको लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर विधानसभा का चुनाव लड़ना है. योगी आदित्यनाथ के लिये गोरखपुर से सुरक्षित कोई दूसरी जगह नहीं है. गोरखपुर के कुछ विधायक अपनी सीट से इस्तीफा देकर योगी के लिये विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिये सीट खाली करने का मन भी बना चुके हैं. इसके बाद भी योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर के बजाये अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना दिख रही है. योगी के अयोध्या दौरे के बाद अयोध्या की विकास योजनाओं पर जिस तरह से सरकार अपना फोकस बढ़ा रही है, उससे यह साफ होने लगा है. भाजपा योगी को हिन्दुत्व और अयोध्या से जोड़कर देखना चाहती है, जिससे 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को बढ़त हासिल हो सके.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गंगा की सफाई को लेकर धार्मिक मुद्दा चुनाव में उठाया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गाय और गौ वंश को लेकर धार्मिक वोटबंदी करने की योजना में है. दक्षिण भारत, गोवा और देश के कुछ पहाड़ी इलाकों में गाय और गौ वंश के मीट को लेकर नया विरोध और समर्थन शुरू हो गया है. भाजपा से जुडे साधूसंत भी इस मुद्दे को हवा देने में जुट गये हैं. गंगा सफाई के वादे को 3 साल बीत गये हैं. गंगा में पानी जस का तस ही है. ऐसे में अब भाजपा नये धार्मिक मुद्दे तलाशने में लग गई है.

अयोध्या और गाय दोनों ही ऐसे सबसे बडे मुद्दे हैं जिनपर देश वोटबंदी का शिकार हो सकता है. राममंदिर आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश से अधिक देश के बाकी हिस्से पर हो रहा है. जिस तरह से अदालत ने अयोध्या विवाद में तेजी दिखाई है उससे साफ लगता है कि आने वाले कुछ साल तक देश की राजनीति अयोध्या मुद्दे के आसपास ही रहेगी. योगी आदित्यनाथ खुद को राजनीति के केन्द्र में रखने के लिये अयोध्या का सहारा ले सकते हैं.

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