वे अपने पिता की तरह दरगाहों पर सिर  झुकाते हैं, चादर चढ़ाते हैं. भीड़ में खड़े किसी बड़ेबूढ़े के कंधे पर हाथ रख कर उस का हालचाल पूछते हैं, उस के पैर छू कर आशीर्वाद लेते हैं. मुसलिम टोपी पहन कर फोटो खिंचवाते हैं. पिछड़ी और दलित बस्तियों में घूमते हैं, गरीबों की  झोंपडि़यों में जा कर पानी, दूध और लस्सी पीते हैं. भीड़ को देख हाथ जोड़ कर प्रणाम करते हैं. गरीबों की तरक्की की बातें करते हैं. समाज के पिछड़े लोगों को इंसाफ और अधिकार न मिलने पर राज्य और केंद्र सरकारों को कठघरे में खड़ा करते हैं.

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