उत्तर प्रदेश के इन विधानसभा चुनावों में अखिलेश राहुल और मोदी शाह की जोड़ी थी, तो मायावती अकेले ही चुनाव मैदान में थीं. तीनों एकदूसरे के खिलाफ लट्ठमार होली सी खेलते नजर आए. किसी ने जनता को यह भरोसा नहीं दिलाया कि जीत के बाद वह क्या करेगा? केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि बाकी राज्यों के चुनावों में भी मुद्दों की जगह जुमले उछालते रहे. यह केवल अपने देश की ही बात नहीं है, दुनिया के दूसरे देशों में होने वाले चुनावों में भी नेता जनता को ऐसे ही लुभाते नजर आते हैं. अब चुनाव लड़ना एक प्रबंधन कला है, जिस में बड़ीबड़ी कंपनियां शामिल होने लगी हैं. गरीब से गरीब प्रदेश के नेता अब हैलीकौप्टर सेचलते हैं. विकास के मुद्दे हवा में हो गए हैं. यही वजह है कि चुनाव के बाद जीतहार का देश के विकास पर कोई खास असर नहीं पड़ता है.

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