नेपाल में हुए आम चुनाव इस बार जुदा तसवीर के साथ संपन्न हुए. नतीजों में जनता ने माओवाद को न सिर्फ सिरे से खारिज किया बल्कि बंदूक और हिंसा की सियासत को भी नकार दिया. लेकिन लगता है माओवादी अभी भी गलतफहमी के शिकार हैं. कैसे, यह बता रहे हैं बीरेंद्र बरियार ज्योति.

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