26 मई, 2014 को जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तब भगवा खेमे के 5-6 फीसदी लोगों को छोड़ बाकियों ने बड़े तटस्थ और निरपेक्ष भाव से यह सोचते सत्ता मोदी के हाथ में सौंप दी थी कि चलो, एक दफा इन्हें भी देख लेते हैं, हर्ज क्या है. बातें तो इन्होंने दूसरों के मुकाबले ज्यादा बड़ीबड़ी की हैं कि ये कर दूंगा वो कर दूंगा, अब देखते हैं क्याक्या चमत्कार होते हैं. उन का यह भी कहना था कि कांग्रेस और गांधीनेहरू परिवार देश को खोखला कर रहे थे, वे उसे मजबूती देंगे.

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