मुलायम और अखिलेश के बीच समझौते की बाधा अमर सिंह नहीं प्रोफेसर राम गोपाल यादव हैं. मुलायम सिंह यादव ने समझौते की राह पर आगे बढ़ते हुये अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने का मन बना लिया था. अमर सिंह अपनी ओर से सुलह के लिये इस्तीफा देने को तैयार हो गये थे. 6 जनवरी को अमर सिंह के इस्तीफा देने के बाद सुलह समझौते की राह खुल जानी थी. मुलायम खेमे की ओर से इस बात की घोषणा के लिये विक्रमादित्य मार्ग मुलायम के आवास पर शाम 4 बजे मीडिया को बुला भी लिया गया था. मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि अगर वह एक कदम पीछे हटे तो अखिलेश खेमा भी पीछे हटे. मुलायम खेमे की ओर से कहा गया कि अमर सिंह के साथ रामगोपाल यादव का भी इस्तीफा हो.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बात के लिये तैयार नहीं हुये. जिसके बाद मुलायम सिंह यादव ने भी अपने कदम पीछे खींच लिये. इसके बाद सुलह के दरवाजे बंद हो गये. मीडिया को मैसेज भेज कर प्रेस कांफेंस के कैसिंल करने की घोषणा कर दी गई. रामगोपाल इस बात के लिये पूरी तरह से अखिलेश पर दबाव बनाये हैं कि वह मुलायम से सुलह न करे. समाजवादी पार्टी और साइकिल सिंबल उनका ही होगा. अखिलेश केवल साइकिल सिंबल और समाजवादी पार्टी की वजह से ही पिता मुलायम से समझौते की बात कर रहे हैं. अगर चुनाव तक दोनो में समझौता नहीं हुआ तो चुनाव के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट जायेगी.

मुलायम सिह को बेटे अखिलेश से अधिक भाई रामगोपाल पर गुस्सा है. वह मानते हैं कि रामगोपाल की वजह से ही अखिलेश से विद्रोह किया है. कई अवसरों पर राम गोपाल की टिप्पणी मुलायम को आहत करने वाली रही है. यादव परिवार में जहां बाकी लोग मुलायम के साथ एकजुट हैं वहीं रामगोपाल मुलायम के विरोध में खड़े हो जाते हैं. मुलायम इसे अपना अपमान करने वाला मानते हैं. सुलह के लिये मुलायम अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने को तैयार थे पर जब मुलायम की तरफ से रामगोपाल को बाहर करने की बात कही गई तो अखिलेश पीछे हट गये.

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