दो दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति दलित-पिछड़े और मुसलिम वोट बैंक के आसपास घमूती रही है. पहली बार अगडे वोट बैंक के लिये कांग्रेस और भाजपा के बीच रस्साकशी शुरू हुई है. ब्राहमणों के बाद कांग्रेस ने अब ठाकुर नेताओं पर ध्यान देना शुरू किया है. इस तोडफोड के क्रम में चार बार विधायक और बसपा सरकार में मंत्री रहे बादशाह सिंह ने भाजपा को छोड कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. बादशाह सिंह के साथ उनकी पत्नी रत्ना सिंह ने भी कांग्रेस की सदस्यता ले ली है.

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