Solo Dining: रविवार की शाम है. एक रैस्टोरैंट में लगभग हर टेबल पर परिवार, दोस्त या कपल्स बैठे हैं लेकिन एक कोने की टेबल पर एक लड़की अकेली बैठी है. उस ने अपना खाना और्डर किया है, ईयरफोन लगाए है और आराम से किताब पढ़ते हुए खाना खा रही है. कई लोगों की नजर उस पर पड़ती है. कुछ सोचते हैं, ‘बेचारी अकेली होगी’, तो कुछ के मन में सवाल आता है, ‘क्या इस का किसी से झगड़ा हो गया?’
लोगों को लगता है कि अगर कोई व्यक्ति अकेले रैस्टोरैंट में बैठ कर खाना खा रहा है तो वह या तो उदास है, उस के दोस्त नहीं हैं, उस का ब्रेकअप हो गया है या फिर वह इंट्रोवर्ट है. लेकिन दुनिया बदल रही है. अब सोलो डाइनिंग यानी अकेले बाहर जा कर खाना खाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. खासकर बड़े शहरों में युवा खुद के साथ समय बिताने, नई चीजें एक्सप्लोर करने और अपने लिए कुछ समय निकालने के लिए अकेले रैस्टोरैंट जा रहे हैं. इतना ही नहीं, यह ट्रैंड रैस्टोरैंट इंडस्ट्री को भी बदल रहा है.
सोलो डाइनिंग क्या है?
सोलो डाइनिंग का सीधा सा मतलब है कि कोई व्यक्ति बिना किसी दोस्त, परिवार या पार्टनर के अकेले किसी कैफे, रैस्टोरैंट या फूड आउटलेट में जा कर खाना खाए. यह अकेलेपन का प्रतीक नहीं है, बल्कि कई लोगों के लिए यह खुद के साथ बिताया गया क्वालिटी टाइम है. जैसे कुछ लोग अकेले फिल्म देखने जाते हैं, अकेले ट्रैवल करते हैं या अकेले शौपिंग करते हैं, वैसे ही कुछ लोग अकेले खाना खाना भी पसंद करते हैं.
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