भारत में भुजिया बनाने का काम राजस्थान के बीकानेर से शुरू हुआ. वहां जो नमकीन तैयार होता है, उस में भुजिया सब से ज्यादा बनती है. भारत के दूसरे शहरों में भुजिया की जगह बेसन से तैयार सेव ज्यादा बनाए जाते हैं, जो भुजिया से मोटे होते हैं. शुरुआत में भुजिया केवल बेसन से तैयार होती थी. इसे चटपटा बनाने के लिए बेसन के बड़े टुकड़े तल कर डाले जाते थे, जो पूरी तरह से मसालेदार होते थे. समय के साथ भुजिया बनाने में बदलाव हुआ. अब भुजिया बनाने के लिए बेसन के साथ आलू का इस्तेमाल भी होने लगा है. इस के बाद से?भुजिया का बाजार बढ़ने लगा है. आलू और बेसन से तैयार भुजिया खाने वालों को ज्यादा पसंद आने लगी. अब यह बाजार में बिकने के लिए पैकेटों में आने लगी है.

पूरे देश के नमकीन बनाने वालों को भुजिया बनाने का फायदेमंद काम पसंद आने लगा है. इस से  चने और आलू की खेती करने वालों को भी नया रास्ता दिख गया है. वे भी अब भुजिया बनाने लगे हैं. पूरे देश में भुजिया बनाने का काम गृहउद्योग की तरह फैल गया है.

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चटपटे पकवानों की शौकीन लखनऊ की मनीषा त्रिपाठी कहती?हैं, ‘भुजिया खाने में दूसरे नमकीनों के मुकाबले काफी अच्छी होती है. सब से अच्छी बात यह है कि इसे बनाना सरल होता है. केवल मशीन से ही नहीं, हाथों से भी इसे बनाया जा सकता है. यह रोजगार का अच्छा जरीया हो सकती है.’

हमारे देश में आलू की अच्छी पैदावार होती है. आलू भुजिया की मांग बढ़ने के बाद से आलू के किसानों की फसल बरबाद नहीं होगी. उस के दाम कम नहीं होंगे और आलू किसानों को अच्छा मुनाफा मिलेगा. इस तरह फूड प्रसंस्करण होने से किसानों का मुनाफा बढ़ रहा है. फसलों से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल इस तरह हो तो किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलेगा.

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