इंटेलेक्चुअल आतंकवाद की कलई खोलने के साथ साथ आदिवासियों की भलाई की बात करने वाले नक्सली किस तरह महज खून की नदियॉं बहाने के लिए भोलेभाले आदिवासियों को नुकसान पहुॅचाने के साथ साथ उनका षोशण करते है,इस बात को रेखांकित करने वाली फिल्म का नाम है-‘‘बुद्धा इन ट्रैफिक जाम’’. फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से यह भी बताने का प्रयास किया है कि राजनेता और नक्सलियों की मिली भगत से आदिवासियों का भला नहीं हो पा रहा है.

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