मैं एक कुत्ता-टीपू. सेन साहब जब 4 साल पहले मुझे लाए थे तो सब गोद में लिए घूमते रहते थे. मैं भी बच्चों के साथ खूब मजे करता था, उन के मुंह चाटा करता था. बच्चे अकसर अपने हिस्से की चौकलेट मुझे दे दिया करते थे. जिंदगी मजे में गुजर रही थी, पर जैसेजैसे मैं आकार में बढ़ता गया और मेरी खुराक बढ़ती गई, उसी हिसाब से सेन साहब के परिवार का मेरे प्रति प्रेम घटता गया.

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