मैं एक कुत्ता-टीपू. सेन साहब जब 4 साल पहले मुझे लाए थे तो सब गोद में लिए घूमते रहते थे. मैं भी बच्चों के साथ खूब मजे करता था, उन के मुंह चाटा करता था. बच्चे अकसर अपने हिस्से की चौकलेट मुझे दे दिया करते थे. जिंदगी मजे में गुजर रही थी, पर जैसेजैसे मैं आकार में बढ़ता गया और मेरी खुराक बढ़ती गई, उसी हिसाब से सेन साहब के परिवार का मेरे प्रति प्रेम घटता गया.

आज हालत यह है कि मुझे सुबह से ही घर के बाहर बांध दिया जाता है. चेन भी इतनी छोटी रखी है कि ज्यादा घूम नहीं सकता और न तो आनेजाने वालों को भूंक कर डरा सकता हूं. अब तो पास से बकरी भी बड़ी शान से निकल जाती है, जैसे कि मैं एक खुद बकरी हूं. मैं शर्म से पानीपानी हो जाता हूं. घर के सब लोग एकएक कर के काम पर निकल जाते हैं, सिर्फ मैं गेट के पास बंधा रहता हूं और अंदर मिसेज सेन सदा की तरह घर के कामों में ही व्यस्त रहती हैं. मेरे पास सिर्फ पानी का एक बरतन रहता है, उस में से भी कभीकभी पानी गिर जाता है तो कोई दोबारा भरने भी नहीं आता. ऐसे में मेरे पास कोई चारा नहीं है कि आखिर मैं करूं क्या.

कुत्ता बंधा हुआ है, कुछ नहीं कर पाएगा

मैं दिनभर ऊंघऊंघ के थक जाता हूं. साथ में यदि घर में मेरी बिरादरी के कुछ और कुत्ते होते तो उन के साथ गुजारे गए अच्छे पलों को याद कर के टाइम पास कर लेता, पर मैं अकेला लाया गया था, इसलिए यादों का भी कोई सहारा नहीं है. इंसानों की तरह हम कुत्तों में भी सैक्स का अनुपात गड़बड़ हो रहा है. अब कुत्ते ज्यादा हो गए हैं और कोई भी घर में कुतिया नहीं पालना चाहता, इसलिए अगलबगल भी वही कुत्ते और वे भी बंधे हैं. कोई काम के नहीं हैं. भूंकने से भी कोई फायदा नहीं कि थोड़ा टाइम पास हो जाए क्योंकि सब को मालूम है, कुत्ता बंधा हुआ है, कुछ नहीं कर पाएगा, सिर्फ टाइम पास के लिए भूंक रहा है.

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