‘स्वर्गद्वार’ नाम है इस जगह का. यह स्थान बीच बाजार में है और बीच के किनारे है, यानी समुद्री किनारे के बाजार से लगा हुआ. जगन्नाथपुरी के भ्रमण पर जब इस के बारे में सुना तो मुझे ‘स्वर्गद्वार’ नाम पर उत्सुकता हुई. वैसे, पुरी के 3 दिनों के निवास में मुझे इस की वास्तविकता के बारे में पता न चलता यदि संयोगवश हमारा वाहन वहां नहीं रुकता. सामने श्रद्धालु एवं पर्यटक लहरों से अठखेलियां कर रहे थे. आजकल भारत में पर्यटक केवल पर्यटक नहीं हैं और न ही श्रद्धालु केवल श्रद्धालु. ये दोनों, दोनों काम एकसाथ करना चाहते हैं. सही भी है कि बाजारवाद के इस युग में भगवान के दर्शन भी किसी अन्य नफे के साथ होने चाहिए.

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