डिप्रैशन की पकड़ में व्यक्ति कभी न कभी आता ही है और व्यक्ति का मन उदास व बुझाबुझा हो जाता है. कई बार डिप्रैशन इतना हावी हो जाता है कि अस्तित्व शून्य लगने लगता है और तब व्यक्ति खुद को कमतर स्वीकारते हुए दया का पात्र मानने लगता है. संसार के दोतिहाई लोग डिप्रैशन की गिरफ्त में हैं. कारण कुछ भी हो सकते हैं, जैसे आज की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाना, परिवार की बेरुखी या साथ छूटना, आधुनिक जीवनशैली के पीछे दौड़तेदौड़ते थक जाना आदि.

Digital Plans
Print + Digital Plans
Tags:
COMMENT