‘फैट मत खाइए, फैट बुरा है’, ‘खूब फैट खाइए, फैट अच्छा है’, ‘कुछ किस्म के फैट खाइए, लेकिन बुरे फैट से परहेज रखिए’. ये एक बहुत बड़ा कन्फ्यूजन है. जो हमारी नाश्ते की मेज से ले कर डिपार्टमेंटल स्टोर की रैक तक हमारे साथ रहती है. सुबह घर पर हम सोचते हैं कि टोस्ट पर बटर लगाएं या नहीं और दुकानों पर सोचते हैं कि बटर खरीदें कि नहीं. इतना भ्रम हर ओर होगा तो जाहिर है कि फैसला लेना कठिन हो जाएगा और साथ ही इस पहेली को सुलझाने के लिए हम नए स्रोतों की खेज करने लगते हैं.

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