टी-20 सीरीज में टीम इंडिया श्रीलंका को हरा कर जहां नंबर वन की पोजीशन पर पहुंच गई वहीं भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को अंडर 19 वर्ल्ड कप के फाइनल में हमारी जूनियर टीम के हारने से निराश होना पड़ा.

वेस्टइंडीज के युवा खिलाडि़यों ने भारत को 5 विकेट से हरा कर अंडर 19 वर्ल्ड कप 2016 का खिताब अपने नाम कर लिया. भले ही जूनियर टीम वेस्टइंडीज से हार गई पर कई खिलाडि़यों ने अपने परफौर्मेंस से एक अच्छे भविष्य का संकेत दिया है. इन में से बल्लेबाज सरफराज खान ने 6 मैचों में 355 रन बना कर यह साबित किया कि वे सीनियर टीम में जगह बना सकते हैं. वहीं, गेंदबाज आवेश खान ने 6 मैचों में 12 विकेट चटकाए. इस मीडियम पेसर ने दिखा दिया कि अगर मौका मिले, वे आगे और भी विकेट चटकाने में सक्षम हैं. इसी तरह गेंदबाज मयंक डागर ने 4 मैचों में 11 विकेट चटकाए. हालांकि मयंक सभी मैच खेल नहीं पाए लेकिन उन्हें जब भी मौका मिला, बल्लेबाजों को बाहर जाने का रास्ता दिखा दिया.

टीम के कप्तान ईशान किशन ने माना कि फाइनल मैच में फील्ंिडग सही नहीं रही और कुछ कैच छोड़े जो काफी महत्त्वपूर्ण थे. पर यह मानने भर से जूनियर खिलाडि़यों का भला नहीं होने वाला है. उन्हें फील्ंिडग की कमी को दूर करना होगा. इन खिलाडि़यों को अभी लंबा सफर तय करना है. भारतीय अंडर 19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने भी यही बात कही है. जूनियर खिलाडि़यों को इस हार से सबक लेने की जरूरत है.

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