चावल के मामले में बिहार सूबे का काफी नाम है. और चावलमिलों के मालिकों की धांधली के मामले में भी बिहार किसी से कम नहीं है. वहां के धाकड़ मिलमालिक धान तो धड़ल्ले से हासिल कर लेते हैं मगर उस का चावल तैयार कर के देने के मामले में मनमानी करते हैं. अपने चावलों के लिए मशहूर बिहार में चावलमिलों की धांधली पर रोक लगाने में सरकार बिल्कुल ही नाकाम रही है. पिछले 5 सालों से चावलमिल मालिकों के पास बिहार खाद्य निगम के 1342 करोड़ रुपए बकाया हैं और निगम उन्हें वसूलने के लिए कछुए की चाल ही चलता रहा है. जबतब बकाए की वसूली के लिए मुहिम शुरू की जाती है, मगर वह कभी भी अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है.

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