यह जुताई का एक ऐसा खास उपकरण है जिस में ऊपर और नीचे की तरफ 2 या 3 हल जैसे नुकीले आकार की रौड लगी होती है जो जमीन में 1 से 1.5 फुट की गहराई तक जुताई कर मिट्टी को पलट देता है. यह हाइड्रोलक सिस्टम से नियंत्रित होता है.

रोटावेटर के लाभ

* इस में लगे हुए नुकीले हल मिट्टी की जुताई करते हैं और ब्लेडनुमा रौड मिट्टी को पलटने का काम करती है, जिस से कठोर परत टूट जाती?है.

* मिट्टी नरम होने की वजह से फसलों और पौधों की जड़ों को बिना किसी रुकावट के प्रसार करने में मदद मिलती है और वे बेहतर विकास और उपज देती है.

* ऐसा करने से मिट्टी की जड़ों तक औक्सीजन आसानी से पहुंचती है, जो फसलों और पौधों के लिए बहुत जरूरी है. इस वजह से फसल की बढ़वार और पैदावार अच्छी होती है.

* जमीन में उगे खरपतवार और दूसरे वनस्पति को उखाड़ कर जमीन में मिला देता है जिस से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है और उपज अच्छी होती है.

* खेत में एक बार ही रिवर्सिबल प्लाऊ से जुताई करने से जमीन की पानी ग्रहण करने की कूवत बढ़ जाती है.

* मिट्टी पलटने से खरपतवारों के बीज जमीन की गहराई में दब जाते हैं, जिस से उन का अंकुरण कम होता है और खरपतवार नियंत्रण में कारगर है.

* यह मशीन पिछली फसल कटने के बाद जो अवशेष खेत में रह जाते हैं, उन्हें जड़ से खोद कर अच्छी तरह से मिट्टी में मिला देती है.

ये भी पढ़ें- मसालों की कटाई व प्रोसैसिंग

* ये खेत में नाली नहीं बनाता क्योंकि खुद ही ट्रैक्टर के साथ बदल जाता है और दूसरी तरफ से बनी हुई नाली में मिट्टी डाल देता है जिस से मिट्टी का कटाव नहीं होता.

इस का रखरखाव कैसे करें

* इस्तेमाल करने से पहले तय यह कर लें कि उपकरण पूरी तरह से सही?है.

* इस्तेमाल के बाद उपकरण छायादार जगह पर रखें.

* बेरिंगों में ग्रीस या मौबिल औयल का इस्तेमाल करते रहें.

हाइड्रोलिक रिवर्सिबल प्लाऊ पर सरकार कितना अनुदान देगी : इस की अनुमानित कीमत 50,000 से 1,40,000 रुपए तक है. इस में सरकार आप को एनएफएसएम योजना के तहत अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति लघु सीमांत और महिला किसानों के लिए इकाई लागत का 50 फीसदी और सामान्य किसानों के लिए 40 (20 हौर्सपावर से कम ट्रैक्टर पर 20,000 और 16,000 रुपए) 20 से 35 हौर्सपावर तक के ट्रैक्टर पर 70,000 रुपए और 56,000 रुपए अधिकतम अनुदान देती है.

अनुदान के लिए कागजात

* आवेदन पात्र मय लाभार्थी के पासपोर्ट साइज का प्रमाणित फोटो.

* जमीन की जमाबंदी या पासबुक.

* मशीन का क्रय बिल या प्रोफार्मा इनवोइस और अधिकृत विक्रेता का प्रमाणपत्र.

* यंत्र का प्रमाणित फोटो लाभार्थी के साथ.

* शपथपत्र या अंडरटेकिंग.

* ट्रैक्टर के कागजातों की प्रतिलिपि.

ये भी पढ़ें-  जमीन में यकीन, यकीन में धन

अलगअलग राज्यों में अनुदान अलग हो सकता?है. यह योजना ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर है. योजना का फायदा लेने के लिए क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक/सहायक कृषि अधिकारी/सहायक निदेशक, कृषि अधिकारी से संपर्क करें.

Tags:
COMMENT