अपनी ही शादी में बच्चों की उपस्थिति यानी मातापिता की शादी में बच्चों का शामिल होना कभी समाज के लिए एक मजाक या फिर उलाहने के रूप में देखा जाता था. किसी समय में एक हद तक यह अपमानजनक बात भी हुआ करती थी पर आज के समाज की यह वास्तविकता बन गई है. समाज आज बहुत बदल चुका है. सैलिब्रिटी से ले कर आम कमानेखाने वाले परिवार में भी यह चलन आम होता जा रहा है. दरअसल, रूढि़वादी और दकियानूसी समाज के ढांचे अब टूट रहे हैं. समाज अपने बंधेबंधाए दायरे से बाहर निकल रहा है. जाहिर है, यह समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन है.

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