‘‘अच्छी बात है, बेटा.’’

‘‘मम्मा, वे दिल के भी बहुत अच्छे हैं, कई गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं.’’

‘‘करना ही चाहिए, आखिर समाज के प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य हैं कि नहीं.’’

‘‘हां मम्मा, उन का स्वभाव आप से बहुत मेल खाता है. जिस तरह आप दूसरों की सहायता करने के लिए तैयार रहती हैं, वे भी.’’ कुछ पल रुक कर वह फिर बोली, ‘‘मम्मा, वे हैं भी बहुत स्मार्ट. उन को देख कर नहीं लगता कि उन की इतनी बड़ीबड़ी बेटियां होंगी, जैसे आप को देख कर कोई नहीं समझ सकता कि मेरे उम्र की आप की बेटी है मम्मा, आप...’’ इतने में सोमू का फोन बज उठा. वह उस में व्यस्त हो गई.

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