सेठ धनराज के बंगले में मातम छाया हुआ था. उन का इकलौता बेटा पप्पू कांति प्रसाद प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था. 4 दिन पहले जब वह स्कूल गया तो लौट कर नहीं आया.

धनराज की पत्नी आशा खुद बेटे को स्कूल लेने जाती थी. उस दिन किसी कारणवश वह समय पर नहीं पहुंच सकी थी. स्कूल के द्वार के पास पप्पू अपनी मां का इंतजार कर रहा था. जब वह वहां नहीं पहुंची तो वह अकेला सड़क पार करने लगा. परंतु अचानक ही तेज गति से एक ट्रक आया और पप्पू को कुचलता हुआ चला गया. घटनास्थल पर ही उस की मृत्यु हो गई थी.

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