"अरे यार, तुम्हारे घर तक मेरी गाड़ी चली भी जाएगी या नहीं?" अमित ने व्यंग्य का एक और तीर फेंका.

"हां, यह प्रौब्लम तो है.  चलो, तुम्हारी गाड़ी मैं अपने एक मित्र के घर खड़ी करा दूंगा. उस का घर पास ही है," राहुल अमित के व्यंग्य को समझ नहीं पाया.

“”अच्छा, चलो आओ, बैठो, चलते हैं,” अमित ने अपनी नई कार की ओर अहंकार से देखते हुए कहा.

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