सभी कुछ था वहां, स्टेशनों में आमतौर पर पाई जाने वाली गहमागहमी, हाथों में सूटकेस और कंधे पर बैग लटकाए, चेहरे से पसीना टपकाते यात्री, कुछ के पास सामान के नाम पर मात्र एक बैग और पानी की बोतल, साथ ही, अधिक सामान ले कर यात्रा करने वालों के लिए एक उपहास उड़ाती सी हंसी. कुछ बेचारे इतने थके हुए कि मानो एक कदम भी न चल पाएंगे. कुछ देरी से चल रही ट्रेनों की प्रतीक्षा में प्लेटफौर्म पर ही चादर बिछा कर, अपनी अटैची या बैग को सिरहाना बनाए लेटे हुए या सोये हुए थे. कुछ एकदम खाली हाथ हिलाते हुए निर्विकार, निरुद्देश्य से चले जा रहे थे.

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