अमेरिका के विदेश मंत्री, जिसे वहां सैक्रेटरी औफ स्टेट कहा जाता है, जौन कैरी ने उन औरतों, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए बेहद हिम्मत दिखाई, का सम्मान करते हुए कहा कि कोई भी समाज या देश उन्नति नहीं कर सकता अगर वह आधी आबादी को पीछे छोड़ दे. विश्व आर्थिक संगठन का मानना भी है कि जिन देशों में औरतों के अधिकार पुरुषों के बराबर हैं वे ज्यादा प्रतियोगी और अमीर हैं और उन देशों में कानून व्यवस्था की स्थिति भी अच्छी है.

पर जौन कैरी यह संदेश दे किसे रहे हैं. सरकारें लगभग सभी देशों में लिंग भेद समाप्त करना चाहती हैं क्योंकि सरकारी बाबूशाही और नेता दोनों जानते हैं कि यदि ज्यादा उत्पादन होगा तो  ज्यादा कर मिलेगा तो उन की मौज भी ज्यादा होगी.

औरतों को घरों में रोकने वाले पति या पिता हरगिज नहीं होते. पति को ऐसा जीवनसाथी चाहिए जो बराबरी से उस की समस्याएं समझे, हल करे और बराबरी से सैक्स सहयोगी बने. मुर्दा सा शरीर पति के लिए न रसोई या ड्राइंग रूम में काम का है न बिस्तर पर. पिता, मनोवैज्ञानिक फ्रायड की भाषा में, बेटी को बेटों से ज्यादा प्यार करता है.

तो फिर समस्या है कहां? जहां है वहां के बारे में सर्वशक्तिशाली अमेरिका के विदेश मंत्री जौन कैरी भी कुछ कहने में घबराते हैं. उन्होंने पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई, जिसे तालिबानियों ने बस में गोली मारी थी क्योंकि वह स्कूल जाना चाहती थी, या दिल्ली की 23 साला लड़की, जिसे चलती बस में 6 युवकों ने बुरी तरह रेप किया, रौंदा, पीटा, की समस्याओं की जड़ पर प्रहार करने की हिम्मत नहीं दिखाई.

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