दूसरे देशों के नागरिक दोगले हैं या नहीं, पर हम अपने दोगलेपन में माहिर हैं. हमारे नेताओं से ले कर घर के सामने सफाई करने वाले तक कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं और उन की नैतिकता, व्यावहारिकता, रिश्तेदारी, राष्ट्रीयता, भक्ति के पैमाने हर मौके पर बदल जाते हैं. सुबह 4 घंटे पूजा करने वाले घर में मांबहन की गालियां दी जाती हैं और बाहर निकलते ही हम लूट में लग जाते हैं. मंच पर सदाचार का भाषण देने वाले मंत्री कमरे में लौट कर लाखों की रिश्वत लेते हैं.

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