सरकार और उच्चतम न्यायालय के बीच खाई बढ़ती जा रही है. हालांकि कई न्यायाधीशों को सरकारी इशारे पर चलने के खुले संकेत दिए जा रहे हैं, सभी न्यायाधीशों की सामूहिक आवाज के कारण सरकारपसंद न्यायाधीश भी चुपचुप हैं और न्यायाधीशों के मामले में बहुमत का आदर करने को विवश हैं. भारतीय जनता पार्टी जानबूझ कर ऐसे न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय में भेजना चाहती है जो उस की नीतियों का समर्थन करते हैं. अमेरिका में यह खुल्लमखुल्ला चर्चा होती है कि कौन सा न्यायाधीश किस राष्ट्रपति ने नियुक्त किया था और वह किस मसले पर कैसा निर्णय देगा. हमारे न्यायाधीश पिछले 3-4 दशकों से खासे स्वतंत्र रहे हैं और वे खुद ही नए न्यायाधीश नियुक्त करते रहे हैं और इस प्रक्रिया को सरकार भी मानती रही.

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