वर्तमान में कैसा भी परिवार हो, एकल या संयुक्त, मातापिता के मिल कर नौकरी अथवा व्यापार आदि करने के बाद भी बहुत कुछ ऐसा छूट जाता है, जो वे अपने बच्चों के लिए करना चाहते हैं, पर पैसों की कमी के कारण नहीं कर पाते.

किशोरावस्था में बच्चे बहुत से सपने देखते हैं. वे नई चीजें सीखना चाहते हैं, घूमना चाहते हैं. नएनए कपड़े खरीदना चाहते हैं, अपने फ्रैंड्स को बर्थडे पर कीमती उपहार देना चाहते हैं. वे अपना जन्मदिन किसी अच्छे रेस्तरां में मनाना चाहते हैं, अपने लिए मोबाइल, लैपटौप आदि खरीदना चाहते हैं. ऐसी अनगिनत अपनी छोटीछोटी इच्छाएं किशोरों को दबानी पड़ती हैं. चाहते हुए भी मातापिता उन की इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाते, जिस का असर परिवार के माहौल पर पड़ता है.

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