कासगंज की आग ठंडी हो चुकी है. इस के साथ ही साथ चंदन गुप्ता के परिवार के साथ खड़े होने वालों की तादाद भी अब नहीं के बराबर है. दंगे के समय जिस चंदन के शव को तिरंगे में लपेट कर शहीद का दर्जा दिया गया, उस पर उत्तर प्रदेश सरकार चुप है. चंदन की मां को लगता है कि अगर कासगंज में सांप्रदायिक आग नहीं भड़की होती तो उस के घर का चिराग नहीं बुझा होता. देश कासगंज की घटना को भूल सकता है, पर चंदन के परिवार को कासगंज का दंगा कलंक बन कर जीवन भर याद रहेगा.

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