अच्छी और ब्रैंडेड कंपनी का जूता नया होने पर भी नहीं काटता लेकिन घटिया और लोकल कंपनी का जूता 2-4 दिनों तो क्या, जिंदगीभर पैर कुतरता रहता है. यह और इस के साथ यह बात भी शायद केंद्रीय पैट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नहीं जानते कि देश के 75 फीसदी लोग पैसे की तंगी के चलते घटिया या अच्छा तो दूर, जूता ही नहीं पहनते. बचे 25 फीसदी में से भी अधिकतर लोग काटने वाले जूते को फेंक देते हैं.

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