वित्त मंत्री अरुण जेटली अर्थशास्त्र के विद्वान या भारी ज्ञाता नहीं हैं, इसलिए खुद को ऐसे पेश करते रहते हैं मानो नई आर्थिक क्रांति वही लाएंगे. जेटली का नया बयान यह है कि आर्थिक बदहाली के लिए नेहरू मौडल जिम्मेदार है और पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव आर्थिक सुधारों के मसीहा नहीं थे. अरुण जेटली वर्तमान की बात जाने क्यों कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते कि 2 साल में पैसा पैसेवालों के पास ही जा रहा है और किसान व मजदूर और गरीब होते जा रहे हैं. यह हालत हमेशा से ही रही है कि भारत को सोने की चिडि़या कह कह कर मुगलों और अंगरेजों को कोसा जाता रहा है, पर उन पंडेपुजारियों को कोसने की हिम्मत किसी की नहीं जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए विदेशी आक्रांताओं को शह दी.

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