दीवाली मनाने के लिए मेरे बेटेबहू व दोनों पोतियां बेंगलुरु से भोपाल आए थे. छोटी पोती श्रेया 5 वर्ष की है. हम सब बातों में मशगूल थे. श्रेया को व्यस्त रखने की गरज से मैं ने उसे पुराना एलबम दे दिया, जिस में मेरे बेटे यानी श्रेया के डैडी के बचपन के फोटो लगे हुए थे.
उन चित्रों को देख कर वह आश्चर्यचकित थी कि उस के डैडी कभी इतने छोटे भी थे. तभी अचानक उस ने जोर से आवाज लगाई, ‘‘मम्मी, देखो डैडी डस्टबिन में खड़े हैं.’’ एक पल के लिए तो किसी को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन दूसरे पल सभी के मुंह पर मुसकराहट आ गई.
बात उस समय की है जब मेरे बेटे यानी श्रेया के डैडी ने किसी चीज को पकड़ कर खड़ा होना और थोड़ाथोड़ा चलना सीखा था. एक बार फोटो खींचते समय एक गोल स्टूल, जो डमरू के शेप का था, को उलटा कर के उस में उसे खड़ा कर दिया था. उस स्टूल के लिए डस्टबिन जैसा शब्द चुनना श्रेया की सचमुच मौलिक सूझ थी.
मधुरिमा सिंगी, भोपाल (म.प्र.)
 
मेरी बेटी 4 साल की है. प्यारीप्यारी बातें करती रहती है. एक दिन मैं उस के साथ बाजार गई व वापसी के समय मैं ने 2 कप आइसक्रीम खरीदी. मैं ने एक कप आइसक्रीम बिटिया को खाने के लिए दे दी. चलतेचलते उस ने अपनी आइसक्रीम खा ली. थोड़ा आगे चलने पर वह बोली, ‘‘मम्मी, आइसक्रीम जंकफूड होता है. इस के खाने से दांतों में कैविटी हो जाती है. आप ऐसा करें कि जो आइसक्रीम आप के पास है, आप उसे नहीं खाना. कहीं आप को कैविटी न हो जाए. इसलिए आप इसे भी मुझे दे दीजिए क्योंकि मेरे दांतों में तो कैविटी पहले ही हो रही है.’’
मैं उस की प्यारी बात सुन कर हंसे बिना न रह सकी.
शिखा मलिक, विकासपुरी (नई दिल्ली)
 
मेरा 4 वर्षीय बेटा तेजस नटखट और बहुत ही हाजिरजवाब है. जब वह बोलता है तो मेरे पति का गुस्सा फौरन काफूर हो जाता है. इसी बात पर मैं ने एक दिन उन्हें गुस्से में कहा, ‘‘आप बहुत जल्दी पिघल जाते हैं.’’
इस पर वहीं खड़े मेरे बेटे ने पापा से पूछा, ‘‘पापा, तुम बर्फ हो क्या?’’ उस के पापा ने तुरंत कहा, ‘‘नहीं.’’ जवाब सुन कर तेजस तुरंत बोला, ‘‘फिर तुम पिघल कैसे जाते हो?’’
उस की बात समझ में आते ही हम ठहाका लगाए बिना न रह सके.
निशा सिन्हा, माल्या (प.बं.)

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