योजना आयोग को खत्म करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इरादे से उन लोगों में मायूसी है जो सरकारी पैसे पर गिद्ध दृष्टि रखते हैं. इस आयोग के बारे में आमतौर पर लोग यही जानते हैं कि यह देश के भले और विकास की योजनाएं बनाता है और इस के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया हुआ करते थे जिन्होंने शराफत दिखाते हुए लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद इस्तीफा दे दिया था. योजना आयोग जैसी दर्जनों सरकारी एजेंसियां सफेद हाथी ही साबित हुई हैं जो राजनीतिक उद्देश्यों को ले कर बनती हैं, इन के खुद के खर्च भी भारीभरकम होते हैं. जनता के पैसे को बरबादी से बचाने के लिए आइडिया अच्छा है बशर्ते कोई दूसरी वैकल्पिक एजेंसी खड़ी न की जाए. बेहतर होगा यदि योजनाएं आम जनता से ही बनवाई जाएं.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

सरिता डिजिटल

डिजिटल प्लान

USD4USD2
1 महीना (डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें

डिजिटल प्लान

USD48USD10
12 महीने (डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें

प्रिंट + डिजिटल प्लान

USD100USD79
12 महीने (24 प्रिंट मैगजीन+डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...