महीपत के 1 बेटी और 1 बेटा थे. दोनों भाई बहन एक साथ पले बढे़ थे. उन में कोई मतभेद भी नहीं था. महीपत ने अपनी पत्नी लक्ष्मी की मौत के बाद वसीयत तैयार कराई और उस में अपनी बेटी को भी बराबर का अधिकार दिया. महीपत की मौत के बाद उस की सारी प्रौपर्टी 2 हिस्सों में बंटनी थी. भाई शिवम को बहन रश्मि से कोई दिक्कत नहीं थी. उसे अपने बहनोई दिवाकर से समस्या थी.

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