दिल्ली में प्रदूषण किस कदर बढ़ चुका है इसकी गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि एक टेक कंपनी में एनालिटिक्स हेड को जब दिल्ली में 80 फीसदी सैलरी जंप के साथ औफर दिया गया, तो भी उसने राजधानी की जहरीली हवा में काम करने से इनकार कर दिया.

हालांकि बाकी दिल्लीवासी मुंह में हाथ, रुमाल या बेअसर मास्क पहनकर रोज जी ही रहे हैं. अखबार हवा की बदतर स्थिति का हवाला देकर आगाह करते हैं लेकिन बढ़ते प्रदूषण से फेफड़े चोक करवाने के सिवा आम लोगों के पास कोई और विकल्प बचा है क्या.

हालांकि पूरी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स को 401 यानी जिसे बेहद खतरनाक स्थिति में देखते हुए पर्यावरण मंत्रालय का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सार्वजनिक स्थलों पर एयर प्यूरीफायर लगवाने का निर्णय लिया है. दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले आइटीओ चौक से इसकी शुरूआत कर दी गई है.

प्रदूषण की पब्लिसिटी

अब यह प्रदूषण भले ही आम लोगों का दम घोट रहा हो लेकिन एयर प्योरिफायर कम्पनियों के लिए यह मुनाफे का सौदा बनकर आया है. जैसे जैसे प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है इनके प्रचार कैम्पेन भी तेज होते जा रहे हैं. जिसकी वजह से एयर प्यूरीफायर की सेल बढ़ रही है. साथ ही ये न्यूज़ बिज़नेस के रूप में भी उभर के आ रहा है.

यों तो इनकी सेल पूरे देश के लिए होती है लेकिन अब ये दिल्ली को टार्गेट कर अलग तरह के प्रोमोशनल प्रोडक्ट कैम्पेन चला रहे हैं. जिसमें होर्डिंग्स में बड़े बड़े अक्षरों में दिल्ली की बदतर हवा के आंकड़े दिखाकर अपना सामना बेचने की अपील की जा रही है. चाइना की फोन सेलिंग कम्पनी एमआई ने अपने नए एयर प्योरिफायर के एक एड में ऐसा ही किया है.

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