देश के करोड़ों कर्मचारियों की भविष्य निधि का संचालन करने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ तेजी से डिजिटल प्रक्रिया की तरफ बढ़ रहा है. कर्मचारियों की भविष्य निधि से जुड़ी योजनाओं का डिजिटीकरण किया जा चुका है और कर्मचारी अपने मोबाइल से अब जब व जहां चाहें सारी सूचनाएं अपनी निधि के बारे में हासिल कर सकते हैं.

संगठन का सब से अच्छा काम यह कहा जा सकता है कि उस ने नौकरी बदलने वाले लोगों के लिए एक ही खाता प्रणाली विकसित की है. पहले नए संगठन में जाने के बाद नया खाता खुलता था और पुराना खाता बंद करना पड़ता था. इस से कई लोग पैसा छोड़ देते थे या तरहतरह की बाबुओं द्वारा पैदा की गई दिक्कतों को बारबार ईपीएफओ के दफ्तर के चक्कर लगा कर झेलते रहते थे.

कर्मचारियों की इस समस्या का निदान हो गया है और अब वे जहां भी जाएं, उन का पैसा खुदबखुद उन के खाते में कंपनी जमा कर देगी. पैसा कितना जमा हुआ, कब जमा किया गया, इस का पूरा विवरण उन्हें अपने मोबाइल में मिल जाता है. संगठन के केंद्रीय आयुक्त वी पी जौय का कहना है कि अगले स्वतंत्रता दिवस तक संगठन की सभी सेवाओं का डिजिटीकरण हो जाएगा और ईपीएफओ 15 अगस्त, 2018 से पूरी तरह पेपरलैस हो जाएगा.

ईपीएफओ कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952, कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना 1976 तथा कर्मचारी पैंशन स्कीम 1995 को संचालित करता है. जौय का कहना है कि संगठन के पास 10 लाख करोड़ रुपए की जमाराशि है और समाप्त वित्त वर्ष में उस ने डेढ़ लाख करोड़ रुपए का निवेश भी किया था.

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