सरकार दवा निर्माता तथा चिकित्सा उपकरण निर्माता कंपनियों के घटिया उत्पाद पर नकेल कसने के लिए कानून में संशोधन कर रही है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ को संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है.

संशोधन के प्रस्ताव में चिकित्सा उपकरण अथवा मानक के अनुकूल दवा नहीं होने पर कंपनी को मुआवजा देना पड़ेगा. अब तक मरीज को इस वजह से होने वाले नुकसान के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं माना जाता था. प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि देश में रोगी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने और गुणवत्ता रहित औषधि व चिकित्सा उपकरण के कारण उसे नुकसान नहीं हो, इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

सीडीएससीओ ने संशोधन के लिए एक पैनल बनाया है. पैनल उपभोक्ता संरक्षण की थीम पर काम कर रहा है. बड़ा सवाल यह है कि गुणवत्ता को ले कर नकेल तो कसी जा सकती है लेकिन अस्पताल के डाक्टर और स्टाफ मोटी रकम ऐंठ कर जो अभद्रता मरीज के परिजन से करते हैं उस पर नकेल कैसे कसी जाएगी. आएदिन अस्पतालों में डाक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत और अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मरीजों के परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार की खबरें आती हैं. कई बार इस वजह से डाक्टरों के हड़ताल पर चले जाने की खबरें भा आती हैं लेकिन निरीह मरीज और उन के परिजनों के बारे में कोई सोचता नहीं है.

डाक्टरों और खास कर निजी अस्पताल के डाक्टर मरीज के परिजनों का शोषण करते हैं. वे उन का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न  करते हैं. इस पर नियंत्रण की जरूरत है. उन की मनमानी पर लगाम लगाने की भी आवश्यकता है.

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