कलाकार- ईशा गुप्ता, मुरारी शर्मा, जरीना वहाब, राजेश शर्मा, जाकिर हुसेन, दीपशिखा नागपाल, परीक्षत साहनी, अनंत महादेवन व अन्य.

निर्देशक व निर्माता- अशोक कुमार नंदा

बौलीवुड में कानून, अदालत व सिस्टम पर सवाल उठाने वाली फिल्म बनती रही हैं, मगर अब तक किसी भी फिल्मकार ने अपनी फिल्म में इस बात का चित्रण ही किया कि यदि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश किसी निर्दोष को सजा दें और मुलजिम को बरी कर दें, तब क्या होगा? मगर फिल्मकार अशोक कुमार नंदा ने अपनी फिल्म ‘‘वन डे जस्टिस डिलिवर’’ में इसी बात को रेखांकित करते हुए अदालती कार्यप्रणाली और सिस्टम पर कई सवाल खड़े किए हैं. इस फिल्म में उच्च न्यायालय के जज को एक मां अपने बेटे के हत्यारों को बरी करने वाले जज को अदालत में ही थप्पड़ मारती है, जज को गलती का अहसास होता है, पर उस वक्त वह कानून के दायरे में बंधा होता है. मगर न्यायाधीश के पद से अवकाशग्रहण करते ही वही जज उन चारों आरोपियों को अपने रीके से सजा देता है, जिन्हें उसने बेगुनाह बताकर बरी किया था.

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