आजकल ज्यादातर फिल्मों की रिलीज से पहले कानूनी झमेला होना आम बात हो गई है. कभी धार्मिक भावनाओं के नाम पर तो कभी कौपीराइट जैसे मसलों को ले कर फिल्मों की रिलीज पर रोक लगाने का ड्रामा खेला जाता है.

हाल ही में फिल्म ‘गुलाब गैंग’ के साथ भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा था. इस फिल्म के प्रदर्शन पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी फिर ऐन वक्त पर लगाई गई रोक को वापस ले लिया. कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में गुलाबी गैंग नामक महिला समूह का गठन करने वाली कार्यकर्ता संपत पाल के जीवन पर आधारित इस फिल्म के लिए संपत पाल की अनुमति नहीं ली गई थी जिस से नाराज हो कर संपत पाल ने ही इस की रिलीज रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

 

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