2007 की सफलतम फिल्म ‘नमस्ते लंदन’ की सिक्वअल फिल्म ‘नमस्ते इंग्लैंड’ देखकर अहसास होता है कि फिल्मकार ने बेमन से फिल्म बनायी है. शुरू से अंत तक फिल्म में ऐसा कुछ नही है, जिसके लिए दर्शक अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे व अपना बहुमूल्य समय बर्बाद कर इस फिल्म को देखना चाहेगा.

फिल्म की कहानी के केंद्र में पजांब में रहने वाले परम (अर्जुन कपूर) और ज्वेलरी डिजायनर/आभूषण डिजायनर बनने का सपना देख रही जसमीत (परिणीति चोपड़ा) है.

दशहरे के दिन जसमीत को देखकर परम उस पर लट्टू हो जाता है. फिर वह दिवाली व होली के दिन उसका पीछा करता है. पर बात नहीं जमती. तब अपने दोस्तों की मदद से वो ऐसे हालात पैदा करवाता है कि उनकी मुलाकात हो जाती है और दोनों अपने प्यार को कबूल कर लेते हैं. पर जसमीत के रूढ़िवादी दादाजी (विनोद नागपाल) व भाई बहुत कड़क स्वभाव के हैं.

इसलिए परम व जसमीत को छिपकर मिलने के लिए परम के दोस्त हर दिन नई कहानी गढ़ते रहते हैं. खैर, परम व जसमीत की शादी, जसमीत के दादा की इस शर्त पर होती है कि शादी के बाद भी उनकी बेटी घर से बाहर कदम रखकर नौकरी या व्यापार नहीं करेगी.

जबकि जसमीत की महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी ज्वेलरी डिजायनर बनना है. मगर प्यार के लिए जसमीत शादी कर लेती है. शादी के बाद हनीमून के लिए स्विट्ज़रलैंड जाना है. पर शादी वाले दिन परम का अपने दोस्त से झगड़ा हो जाता है. दोस्त गुस्से में उनका वीजा ही नही होने देता.

तब गैर कानूनी तरीके से लोगों को विदेश भेजने का काम कर रहे ट्रैवेल एजेंट गुरनाम (सतीष कौशिक), परम के सामने प्रस्ताव रखता है कि वह किसी इंग्लैंड की लड़की से शादी कर मैरिज वीजा पर इंग्लैंड चला जाए.

कुछ दिन बाद उसे इंग्लैंड की नागरिकता मिल जाए, तो वह उस लड़की को तलाक देकर अपनी पत्नी जसमीत को भारत से ले जाए. परम इस प्रस्ताव को ठुकरा देता है. मगर जसमीत को तो हर हाल में इग्लैंड जाना है तो वह गुरनाम के प्रस्ताव के पंजाबी, मगर इंग्लैंडवासी समीर उर्फ सैम (आदित्य सील) के साथ शादी कर इंग्लैंड चली जाती है और परम से कहती है कि नागरिकता मिलते ही वह समीर को तलाक देकर उसे इंग्लैंड ले जाएगी. जसमीत का विछोह परम से बर्दाश्त नहीं होता.

परम को इस बात का गुस्सा है कि उसकी पत्नी जसमीत एक पुरूष यानी कि उसकी बजाय एक शहर लंदन से प्यार करती है. इसलिए क्रोध में परम गैरकानूनी रास्ते से इग्लैंड पहुंचता है. वहां पर आलिषा (अलंकृता सहाय) की मदद से जसमीत को सच्चे प्यार का अहसास करा जसमीत के साथ भारत वापस आ जाता है.

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फिल्म ‘‘नमस्ते इंग्लैंड’’ बेसिर पैर की कहानी व अविश्वसनीय घटनाक्रमों से सजी फिल्म है. फिल्म का एक भी द्रश्य या पल तार्किक नही लगता. लेखक ने पुरूषों की ही तरह औरत को भी घर से बाहर निकलकर काम करने की आजादी का मुद्दा उठाया, पर फिर वह खुद भटक गए. फिल्म के शुरू होने के पांच मिनट बाद ही दर्शक कहने लगता है- ‘‘कहां फंसायो नाथ.’’ बेवकूफी से भरे द्रश्यों वाली इस फिल्म के संवाद भी बहुत घटिया हैं. शादी वाले दिन परम का अपने जिगरी दोस्त से झगड़े वाला द्रश्य लेखक व निर्देशक के दिमागी दिवालिएपन को ही उजागर करता है. इसके बाद फिल्म को पूरी तरह से डुबाने में फिल्म के कलाकारों ने अपना योगदान देने में कोई कसर बाकी नहीं रखी.

जहां तक अभीनय का सवाल है तो किसी भी कलाकार का अभिनय प्रभावित नहीं करता. अति कमजोर व ठीक से न लिखे गए किरदारों की वजह से परम के किरदार के साथ अर्जुन कपूर व जसमीत के किरदार के साथ परिणीति चोपड़ा न्याय करने में पूरी तरह से विफल हैं. ‘‘नमस्ते इंग्लैंड’’ से अर्जुन कपूर व परिणीति चोपड़ा के अभिनय करियर पर कई गंभीर सवाल उठते हैं.

‘‘तेवर’’, ‘‘की एंड का’’, ‘‘हाफ गर्ल फ्रेंड’, ‘‘मुबारकां’’ जैसी असफल फिल्में दे चुके अर्जुन कपूर ने अब तक अपने अभिनय में कोई सुधार नहीं किया है. अर्जुन कपूर के चेहरे पर कहीं कोई भाव नहीं आते. अर्जुन कपूर भी अपनी तरफ से अपने अभिनय को संवारने के लिए मेहनत करते नजर नही आते. अर्जुन कपूर ने अपने अभिनय से हर द्रश्य को तबाह ही किया है.

परिणीत चोपड़ा ने एक बार फिर साबित कर दिखाया है कि उनसे उत्कृष्ट अभिनय की उम्मीद रखना बेकार है. ‘शुद्ध देशी रोमांस’, ‘दावत ए इश्क’, ‘हंसी तो फंसी’, ‘किल दिल’ व ‘मेरी प्यारी बिंदू’ जैसी असफल फिल्मों के बाद परिणीति चोपड़ा ने फिल्म ‘‘नमस्ते इंग्लैंड’’ से अपने करियर पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने का काम किया है.

अति घटिया कहानी, अति घटिया पटकथा, अति घटिया संवादों और कलाकारों के अति घटिया अभिनय के साथ ही इस फिल्म का प्रचार भी बहुत घटिया किया गया. यदि फिल्म का प्रचार ठीक से किया गया होता, तो शायद पहले दिन फिल्म कुछ कमा लेती.

पूरी फिल्म देखने के बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि निर्माता निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह के सामने फिल्म ‘‘नमस्ते इंग्लैड’’ बनाने की क्या मजबूरी रही. निर्देशक ने पितृसत्तात्मक से प्रेरित साजिश के मुद्दे को उठाया, पर कुछ देर में ही वह इसे भूल गए. उनके निर्देशन में भी कोई चमक नही है. इस तरह की फिल्में ही भारतीय सिनेमा को बदनाम करने का काम करती हैं.

फिल्म का गीत संगीत भी भुला देने योग्य है.  दो घंटे आठ मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘नमस्ते इंग्लैंड’’ का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह, समीर चोपड़ा, फिरोजी खान, जयंतीलाल गाड़ा आदि ने किया है. फिल्म के निर्देशक विपुल अमृत लाल शाह, पटकथा लेखक सुरेष नायर,संगीतकार हिमेष रेषमिया व पार्श्वसंगीतकार सलीम सुलेमान, कैमरामेन जोनाथन ब्लूम तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, सतीश कौशिक, आदित्य सील, अनिल मांगे, अलंकृता सहाय, विनोद नागपाल व अन्य.

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