कादर खान नहीं रहे. लेकिन वे पहली बार नहीं मरे हैं, इस से पहले वे कई बार अफवाहों की मौत मारे जा चुके हैं. लेकिन हर बार उनके बेटे सरफराज अफवाहों को खारिज कर उनके जिंदा होने की तसल्ली दे देते थे. लेकिन इस बीते साल की आखिरी शाम उनकी जिंदगी की आखिरी शाम साबित हुई. लेखक, शिक्षक, और अदाकारी का एक साथ लोहा मनवाने वाले कादर खान ताउम्र अमिताभ बच्चन की एहसान फरामोशी पर अपना दर्द बयान करते रहे. उन्होंने अमिताभ की न सिर्फ कई सफल फिल्में लिखीं, बल्कि उन्हें संवाद अदायगी का लहजा भी सिखाया, लेकिन असफल और एकाकी दौर में अमिताभ ने उनसे दूरी बना कर रखी, इसका उन्हें दुःख रहा.

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