‘‘किताबों के  बजाय युवाओं का झुकाव सिनेमा की ओर अधिक है.’’ यह बात जब साहित्य अकादमी व पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित लेखक रस्किन ब्रैंड कहते हैं तो अंदाजा लग जाता है कि इस देश में फिल्मों को ले कर युवाओं में जबरदस्त क्रेज है. कुछ समय पहले पाकिस्तानी सांसदों ने भी कहा था कि उन के देश में हिंदी फिल्मों की बाढ़ आ गई है और इन्हें देख कर युवाओं का दिमाग खराब हो रहा है.

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