समाज में टैबू समझे जाने यानी कि वर्जित विषयों के पर्याय बन चुके और ‘‘अंधाधुन’’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके अभिनेता आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) के लिए कहानी व किरदार ही मायने रखते हैं. इन दिनों वह आनंद एल रौय और टीसीरीज निर्मित तथा हितेश केवल्या निर्देशित फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ (Shubh Mangal Zyada Saavdhan) को लेकर अति उत्साहित हैं, जिसमें दो समलैंगिक पुरूषों की प्रेम कहानी है. प्रस्तुत है ‘‘गृहशोभा’’ (Grihshobha) पत्रिका के लिए आयुष्मान खुराना से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत के अंश...

आप अपने आठ वर्ष के करियर में किसे टर्निंग प्वाइंट मानते हैं?

-सबसे पहली फिल्म ‘‘विक्की डोनर’’मेरे कैरियर की टर्निंग प्वाइंट थी. उसके बाद ‘‘दम लगा के हईशा’’टर्निंग प्वाइंट थी. यह फिल्म मेरे लिए एक तरह से वापसी थी. क्योंकि बीच के 3 साल काफी गड़बड़ रहे. ‘‘दम लगा के हाईशा’’के बाद ‘‘अंधाधुन’’टर्निंग प्वाइंट रही. जिसने मुझे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरुस्कार दिलाया. फिर फिल्म‘आर्टिकल 15’भी एक तरह का टर्निंग प्वाइंट था. इस फिल्म के बाद एक अलग व अजीब तरह की रिस्पेक्ट /इज्जत मिली. फिल्म‘‘आर्टिकल 15’’में मैने जिस तरह का किरदार निभाया,उस तरह के लुक व किरदार में लोगों ने पहले मुझे देखा नहीं था.  फिर जब फिल्में सफल हो रही हों,तो एक अलग तरह की पहचान मिल जाती है. मुझे आपका,दशकों से, क्रिटिक्स से भी रिस्पेक्ट मिल रही है. यह अच्छा लगता है.

‘‘अंधाधुन’’के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद आपके प्रति फिल्मकारो में किस तरह के बदलाव आप देख रहे हैं?

-फिल्म‘‘अंधाधुन’’ ने बहुत कुछ दिया है. मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. यह फिल्म चाइना में बहुत बड़ी फिल्म बनी. बदलाव यह आया कि अब लोग मुझे अलग नजरिए से देखते हैं. मुझे रिस्पेक्ट देते हैं. अब दर्शक भी जदा इज्जत दे रहे हैं. जब मैं पत्रकारों से मिलता हूं, तो अच्छा लगता है. क्योंकि ‘अंधाधुन’ एक ऐसी फिल्म है, जिसे मैंने खुद जाकर मांगी थी.

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