Prison Love Story: राजस्थान के जिला नागौर के अड़सिंगा गांव निवासी मूलाराम भाटी के पिता पेमाराम भाटी का पड़ोसी से विवाद चल रहा था. साल 2017 में मूलाराम अपने पड़ोसी को बाइक पर बिठा कर घर से ले गया. बाद में उस पड़ोसी का शव पानी के एक टांके (हौद) में मिला था. पुलिस ने उस की हत्या के आरोप में मूलाराम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.

2023 में मूलाराम भाटी को पड़ोसी की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा हुई. मूलाराम को अजमेर जेल भेज दिया गया. जेल में अच्छे आचरण के चलते आज से 2 साल पहले उसे अजमेर जेल से मंडोर ओपन जेल (जोधपुर) ट्रांसफर कर दिया गया. ओपन जेल में वह खेतीबाड़ी का काम करने लगा.

डेढ़ साल पहले महिला जेल जोधपुर से पति की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रही सीमा घड़से जो मूलत: मुंबई की रहने वाली थी. अच्छे आचरण के कारण मंडोर ओपन जेल में शिफ्ट की गई थी. सीमा को भी मूलाराम भाटी के साथ खेतीबाड़ी करने का काम मिला. मूलाराम ने जब सीमा को ओपन जेल में देखा तो वह उस पर पहली नजर में मर मिटा.

दोनों बंदी साथ में खेतीबाड़ी का कार्य करने लगे. साथ में काम करते हुए पहले जानपहचान हुई, फिर दोस्ती और दोस्ती से कब यह रिश्ता प्यार तक पहुंचा, उन दोनों को भी पता नहीं चला. साथ में काम करते हुए वे एकदूजे को दिल दे बैठे. दोनों जानते थे कि जब तक उम्रकैद की सजा काट कर वे बाहर निकलेंगे, तब तक उन के बाल सफेद हो जाएंगे. ऐसे में दोनों ने जेल की चारदीवारी में इश्क की नई इबारत लिखने का मन बनाया.

दोनों हमउम्र थे. लिवइन में रहने का फैसला कर लिया. दोनों प्रेमी एक कमरे में पतिपत्नी की तरह रहने लगे. दोनों ने शादी करने का फैसला किया. सीमा घड़से ने 40 दिन की पैरोल ली. मूलाराम ने शादी करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर पीठ में याचिका लगाई. मूलाराम की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और स्वप्न चौहान ने की. कोर्ट ने 2 अधिवक्ताओं को मंडोर ओपन जेल भेजा. अधिवक्ताओं ने जेल से लौट कर कोर्ट में बताया कि उम्रकैद की सजा भुगत रहे बंदी मूलाराम और सीमा लिवइन में रह रहे हैं. तब जोधपुर हाईकोर्ट पीठ ने दोनों बंदियों की 22 जुलाई, 2026 को मंडोर ओपन जेल में शादी करने का आदेश पारित कर दिया.

शादी में 21 मेहमानों को शामिल होने की छूट कोर्ट ने दी. शादी का खर्च याचिकाकर्ता मूलाराम भाटी को वहन करना होगा, यह आदेश भी कोर्ट ने दिया. राज्य सरकार को ओपन जेल में होने वाली शादी पर कोई ऐतराज नहीं था, यह सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया. अत: कोर्ट ने जेल प्रशासन के अधिकारियों से कड़ी निगरानी में बंदियों की शादी का निर्देश दिया.

ओपन जेल में शादी करने का कोर्ट का आदेश मिलने पर सीमा और मूलाराम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस शादी में सीमा और मूलाराम के परिजन शामिल नहीं हो रहे थे. ऐसे में फलौदी जिले की एक महिला बंदी, जो सीमा के साथ मंडोर ओपन जेल में सजा भुगत रही थी, सीमा की जेल में रहते खास सहेली बन गई थी. उस सहेली के पिता राधाकिशन ने सीमा का कन्यादान करने का निर्णय लिया. राधाकिशन ने सीमा को गोद ले कर उसे अपनी धर्म बेटी माना और शादी के कार्ड छपवाए. कार्ड में सीमा के पिता की जगह राधाकिशन ने अपना नामपता लिखवाया. वह बेटी से ओपन जेल में मिलने जाते थे, तब से सीमा को जानते थे.

22 जुलाई को रीतिरिवाज से मूलाराम और सीमा की मंडोर ओपन जेल में शादी बड़ी धूमधाम से हो गई. सीमा ने अपने पति का कत्ल क्यों किया था, जिस के आरोप में उसे उम्रकैद की सजा मिली. जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे एक युवक और एक युवती की लव स्टोरी कैसे शुरू हुई और जेल में सात फेरों तक पहुंची… जोधपुर (मंडोर ओपन जेल) में हुई अनोखी शादी की कहानी

‘जेल की सलाखों के पीछे सात फेरे’ की विस्तृत कहानी पढि़ए मनोहर कहानियां के नवंबर 2026 अंक में…  Prison Love Story

 

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