MLC Election: लखनऊ खंड स्नातक MLC चुनाव में ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा हार गईं. आचार्य इंदु प्रकाश भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं. भविष्य बताने वाले की पत्नी MLC चुनाव में हारीं तो यूजर बोले- न पत्नी का भविष्य बता पाए, न जीत का उपाय काम आया. हैरानी की बात है कि जो आदमी टीवी पर बैठकर करोड़ों लोगों का भाग्य बताता है वो अपनी ही पत्नी का चुनाव नहीं बचा पाया. बाबा की भविष्यवाणी क्यों फेल हुई?
स्मिता मिश्रा 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हुई थीं. उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी. अजय राय ने उन्हें लखनऊ खंड स्नातक सीट से प्रत्याशी बनाने का आश्वासन दिया था. कुछ ही दिन बाद अजय राय प्रदेश अध्यक्ष पद से हट गए. नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने स्मिता मिश्रा को एमएलसी चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला लिया. स्मिता निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में डटी रहीं लेकिन जब नतीजे आये तो उन्हें 300 वोट भी नहीं मिले.
इससे बड़ी चुटकुलेबाजी और क्या होगी? जो आदमी टीवी पर बैठकर करोड़ों लोगों का भविष्य बताता है, जो ग्रहों की चाल देखकर बता देता है कि आपका बेटा IAS बनेगा या नहीं? आपकी शादी कब होगी? आपकी नौकरी लगेगी या नहीं? वो आदमी अपनी ही पत्नी का भविष्य नहीं बता पाया?
असली खेल समझिए. ज्योतिष का धंधा डर पर चलता है. लोगों को डराया जाता है कि शनि भारी है, राहु खराब है, मंगल आपको खा जाएगा. फिर उसी डर का इलाज बेचा जाता है. नीलम पहन लो, 21 हजार की पूजा करवा लो, काला धागा बांध लो, पीपल के पेड़ पर पानी चढ़ा दो. यह सब ढकोसलेबाजी में आम आदमी का भला हो न हो ज्योतिष बेचने वाले का भला जरूर होता है. अगर पूजा से ही जीत मिलती तो हर मंदिर का पुजारी मुख्यमंत्री होता. लेकिन हकीकत ये है कि चुनाव वोट से जीता जाता है, पूजा से नहीं.
इस दुनिया में भविष्य सिर्फ स्किल, स्कूल, यूनिवर्सिटीज और टीचर के साइंटिफिक लेक्चर से बनता है. किसी ज्योतिष के उपाय से भविष्य नहीं बनता. आपकी मेहनत, आपकी शिक्षा, आपके फैसले और आपके हालात ही आपका भविष्य तय करते हैं. ज्योतिषी कहेगा कि तुम्हारी किस्मत में सरकारी नौकरी नहीं है. लड़का मान लेगा, पढ़ना छोड़ देगा, फिर सच में नौकरी नहीं लगेगी और ज्योतिषी कहेगा देखो मैंने कहा था ना. असल में यह भविष्य बताना नहीं है बल्कि यह भविष्य बिगाड़ना है. यह एक तरह का मानसिक जहर है जो गरीब आदमी को सबसे ज्यादा बर्बाद करता है. अमीर आदमी ज्योतिषी के पास टाइमपास के लिए जाता है, गरीब आदमी अपनी आखिरी 500 रुपये की पगार देकर जाता है कि मेरी किस्मत कब खुलेगी और ज्योतिषी उसे पैसों की बचत करने की सीख देने के बजाय शांति पाठ बता देता है.
ज्योतिष एक पाखंड है इस बात का सबसे बड़ा सबूत यही MLC वाला चुनाव है. अगर ज्योतिष सच होता तो ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा चुनाव से एक महीना पहले ही बता देता कि पत्नी हार रही है लेकिन पंडित जी तो अपनी पंडिताइन के साथ चुनाव प्रचार में लगे थे. इन्होने खुद ग्रहों को जीत की ओर मोड़ने के कई उपाय किये होंगे लेकिन कोई उपाय काम नहीं आये. क्यों? क्योंकि ग्रहों को आपके वोट से कोई मतलब नहीं है. मंगल ग्रह को नहीं पता कि लखनऊ में MLC का चुनाव हो रहा है. शनि को नहीं पता कि आपका नामांकन कब है? ये सब इंसानों का बनाया हुआ खेल है, ग्रहों का नहीं.
अगर किसी ज्योतिषी को सच में भविष्य दिखता तो वो शेयर मार्केट में सबसे अमीर आदमी होता. उसे लॉटरी का नंबर पता होता. उसे पता होता कि कल कौन सा घोड़ा जीतेगा? लेकिन वो ऐसा नहीं करता. वो सिर्फ आपकी जेब से पैसा निकालना जानता है. ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी की हार से इस पूरे पाखंड की पोल खुल जाती है. जनता ने सोशल मीडिया पर सही कहा, जो अपनी पत्नी को नहीं जिता पाया, वो तुम्हारे ग्रह क्या बदलेगा? जब तक लोग ये नहीं समझेंगे कि भविष्य पत्थर की अंगूठी से नहीं, शिक्षा और सवाल पूछने से बदलता है, तब तक ये पाखंडी ज्योतिषी अपनी दुकान चलाते रहेंगे. MLC Election




