Global Hunger Index 2026: जब पूरा देश दिवाली के 7 लाख करोड़ के व्यापार का जश्न मना रहा है, तब एक रिपोर्ट चुपचाप आई और चली गई. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 100वें नंबर पर पहुंच गया है. हम नेपाल से पीछे हैं, बांग्लादेश से पीछे हैं, श्रीलंका से पीछे हैं. असली सवाल ये है कि जिस देश में हर गली में मंदिर है, हर मोहल्ले में मस्जिद है, जहां ईश्वर के दलाल हर जगह मौजूद हैं और जिस देश की महान संस्कृति का ढिंढोरा पीटते हुए उसे विश्वगुरु तक कहा जाता है वह देश दुनिया के सबसे भूखे देशों की लिस्ट में टॉप 20 में क्यों है?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में 122 देशों में भारत 100वें नंबर पर है. स्कोर 25.8. कैटेगरी सीरियस. मतलब गंभीर भुखमरी. बीजेपी की पिछले 12 सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है. हालांकि गोदी मीडिया इसे भी भारत को बदनाम करने की विदेशी साजिश बता कर बेच देगी लेकिन यह देश पर लगा कलंक ही है. यह बेहद शर्मनाक है कि जिस देश में सबसे ज्यादा मंदिर मस्जिद हैं वह देश भुखमरी में सबसे ऊपर है.

यह रिपोर्ट कोई विदेशी साजिश नहीं है, जैसा कि गोदी मीडिया आपको समझाएगा. इसे आयरलैंड और जर्मनी की दो सबसे पुरानी मानवीय संस्थाएं बनाती हैं और FAO, UNICEF और WHO का डेटा इस्तेमाल करती हैं. भुखमरी के पैमाने को आंकने के लिए चार चीजें देखती हैं. कितने लोगों को भरपेट खाना नहीं मिलता? कितने बच्चे कुपोषण की वजह से बौने रह गए हैं? कितने बच्चे सूख कर हड्डी हो गए हैं? और कितने बच्चे पांच साल से पहले मर गए हैं? इन चारों पैमानों पर भारत का सच शर्मनाक है.

देश में 12 प्रतिशत लोग आज भी भूखे सोते हैं. 32.9 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार हैं और 18.7 प्रतिशत बच्चे वेस्टिंग के शिकार हैं. यानी उनका वजन इतना कम है कि वो दुनिया में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चों में गिने जाते हैं. ये है 12 साल की उस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि जो विश्वगुरु बनने का दावा करती है और जिसने 80 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज पर जिंदा रखा है और इसे ही विकास का नाम दे दिया है.

पिछले 12 साल में जब भी कोई इंटरनेशनल इंडेक्स आता है, बीजेपी का एक ही जवाब होता है. ये भारत को बदनाम करने की साजिश है. डेटा गलत है. तरीका गलत है. टूलकिट है. प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 159वें नंबर पर आया तो इसे भी विदेशी साजिश बताया गया. पिछले साल के हंगर इंडेक्स को भी राष्ट्र को बदनाम करने वाली झूठी रिपोर्ट बताई गई. असल में बीजेपी भूख की सच्चाई को भी राष्ट्रवाद से ढक देती है.

बीजेपी की 12 साल की सबसे बड़ी उपलब्धि अगर कुछ है तो वह 80 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज है. इसमें भी पेंच यह है कि खुद ही 80 करोड़ लोगों को गरीब मान लिया कि उन्हें फ्री अनाज चाहिए और उसी को उपलब्धि भी बता दिया. एक तरफ सरकार कहती है भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है और दूसरी तरफ उसी मुंह से कहती है 80 करोड़ लोग फ्री राशन पर जिंदा हैं. दोनों बातें एक साथ कैसे सच हो सकती हैं? अगर देश इतना अमीर हो रहा है तो 80 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज क्यों चाहिए? और अगर 80 करोड़ लोगों को अनाज देना पड़ रहा है तो फिर कैसी तरक्की?

हकीकत ये है कि इस देश में अनाज की कमी नहीं है. FCI के गोदामों में अनाज सड़ता है. कमी है तो बांटने की नीयत की और पोषण की. लोगों को चावल मिल रहा है, प्रोटीन नहीं मिल रहा. कैलोरी मिल रही है, न्यूट्रिशन नहीं मिल रहा. बच्चा चावल खा कर पेट भर रहा है लेकिन दाल, अंडा, दूध, फल उसे नहीं मिल रहा इसीलिए वो कुपोषित है.

इस रिपोर्ट के आने के बाद भी प्राइम टाइम पर आपको क्या दिखेगा? मंदिर मस्जिद, हिंदू मुसलमान, जिहाद, लव जिहाद, पाकिस्तान और नेहरू ने क्या किया था? किसी डिबेट में आपने देखा है कि एंकर ने पूछा हो कि भारत में 18.7 प्रतिशत बच्चे सूख कर क्यों मर रहे हैं? नहीं देखा होगा क्योंकि भूख में TRP नहीं है. भूख से नफरत नहीं बिकती. भूख पर डिबेट करोगे तो सरकार से सवाल पूछना पड़ेगा और सवाल पूछोगे तो विज्ञापन बंद हो जाएगा.

मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए ये खबर ही नहीं है. गोदी मीडिया आपको बताएगी कि मोदी जी ने वर्ल्ड लीडर्स के साथ हाथ कैसे मिलाया? लेकिन वो ये नहीं बताएगी कि उसी वर्ल्ड में हमारे बच्चे भूख से कैसे मर रहे हैं? दरअसल यह भारतीय मीडिया की मौत है जिसे प्रेस फ्रीडम इंडेक्स ने पहले ही साबित किया हुआ है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह देश भूखा क्यों है? क्योंकि हमने अन्न का दान भंडारे तक सीमित कर दिया है, सिस्टम तक नहीं पहुंचाया. हमने भूख को पुण्य का विषय बना दिया है, पॉलिसी का नहीं. एक दिन मंदिर में 10 हजार लोगों को खिचड़ी खिला कर हम सोचते हैं कि हमने भूख मिटा दी. लेकिन बाकी 364 दिन वो 10 हजार लोग क्या खाएंगे? ये कोई नहीं सोचता.

धर्म ने हमें सिखाया है कि भूखा होना पिछले जन्म का पाप है, किस्मत है, भगवान की मर्जी है. लेकिन सच यह है कि भूखा होना पिछले जन्म का पाप नहीं, सरकार की नाकामी है. जिस देश में 5 किलो अनाज के लिए वोट मांगा जाता है, उस देश में लोग कभी भूख से आजाद नहीं हो सकते. क्योंकि नेता चाहते हैं कि आप हमेशा भूखे रहें ताकि वो आपको खाना दे कर भगवान बन सकें. अगर सबका पेट भर गया तो फिर मंदिर मस्जिद के नाम पर वोट कौन देगा? यह 100वां नंबर देश पर कलंक है. भुखमरी का यह नंबर इतना साबित करने के लिए काफी है कि हमने आसमान में झंडा गाड़ने के चक्कर में जमीन पर बैठे भूखे बच्चे को देखना ही बंद कर दिया है. देश के 33 प्रतिशत बच्चों को बौना कर हमने विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति बना दी. क्या यही विश्वगुरु का मॉडल है? Global Hunger Index 2026

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