Russia Ukraine War: रूस और उक्रेन के बीच की जंग को चार साल हो गए. 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ युद्ध आज भी खत्म नहीं हुआ. इस युद्ध में 95 लाख बेघर हुए और तक़रीबन 15 लाख लोग मारे गये. अब पहली बार यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी टीवी पर कहा है कि हां, हम फ्रंटलाइन को फ्रीज करने को तैयार हैं. मतलब जहां रूसी सेना खड़ी है वहीं लकीर खींच दो, हम 75 प्रतिशत देश पर रुक जाएंगे, बस युद्ध रोक दो. जेलेंस्की का ये बयान किसी समझौते का नहीं, थकान का नतीजा है. जेलेंस्की के इस बयान के बाद क्या युद्ध रुक जाएगा? सवाल ये नहीं है बल्कि बड़ा सवाल यह है कि जिस युद्ध को दोनों तरफ भगवान के नाम पर पवित्र बताया जा रहा था, उस पवित्र युद्ध ने आखिर इंसानों को ही क्यों लील लिया? और जब बम गिर रहे थे तब वो भगवान कहां था?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आखिरकार वो बात कह दी है जो वो पिछले तीन साल से कहने से बच रहे थे. अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज़ पर इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या आप 75 प्रतिशत यूक्रेन पर रुकने को तैयार हैं और बाकी 25 प्रतिशत रूस के पास जाने देंगे? तो उन्होंने कहा कि “हम फ्रंटलाइन को वहीं फ्रीज कर देते हैं. इसके बाद हम अमेरिका और यूरोप से सिक्योरिटी गारंटी मांगेंगे कि रूस दोबारा हमला नहीं करेगा”

इस बयान से साफ है कि जेलेंस्की ने मान लिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए इस वक्त रूस ने यूक्रेन के जिस 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किया है, जिसमें क्रीमिया और डोनबास का बड़ा हिस्सा शामिल है उसी लकीर को वह बॉर्डर मान लेंगे. ये एक राष्ट्रपति का सरेंडर नहीं, एक थके हुए देश का दर्द है जो चार साल से रोज बम गिन रहा है और इस दर्द के पीछे जो आंकड़ा है जो किसी भी धर्म की किताब से बड़ा है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस युद्ध में 95 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं. 95 लाख. ये सिर्फ एक नंबर नहीं है. ये 95 लाख कहानियां हैं. कोई महिला अपने दो बच्चों के साथ पोलैंड के बॉर्डर पर बर्फ में चल रही है, कोई बूढ़ा अपने घर के मलबे में अपनी पत्नी की लाश ढूंढ रहा है, कोई बच्चा पिछले दो साल से अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन में किताबों की जगह बमों के खोल पढ़ रहा है.

धर्म कहता है कि ईश्वर दयालु है, ईश्वर सर्वत्र है और ईश्वर रक्षा करता है. तो सवाल है कि जब मारियुपोल के थिएटर पर बम गिरा, जहां सैकड़ों बच्चे छिपे थे और बाहर बड़े अक्षरों में लिखा था CHILDREN, उस वक्त वो दयालु ईश्वर कहां था? जब बूचा में सड़कों पर सिविलियंस की लाशें पड़ी थीं और उनके हाथ पीछे बंधे थे तब कौन सी प्रार्थना कम पड़ गई थी? युद्ध की यह विभीषिका इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि ऊपर कोई नहीं देख रहा. युद्ध इंसानों ने शुरू किया और भुगत भी इंसान ही रहे हैं. लोग भूखे भजन गाते रहे लेकिन कोई फरिश्ता ऊपर से रोटी लेकर नहीं आया.

यह युद्ध सिर्फ जमीन का नहीं, दो चर्चों का भी युद्ध है. दोनों तरफ एक ही भगवान है और दोनों तरफ उसी भगवान के नाम पर लोग मारे जा रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को होली वार कहते हैं. उनके लिए ये यूक्रेन के खिलाफ नहीं, बल्कि पश्चिम के शैतानी, समलैंगिक, नास्तिक कल्चर के खिलाफ धर्मयुद्ध है. मास्को के पैट्रिआर्क किरिल, जो रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के सबसे बड़े पादरी हैं, ने खुलेआम कहा था कि यूक्रेन में मरने वाला हर रूसी सैनिक पवित्र है और उसके सारे पाप धुल जाएंगे और वो सीधे स्वर्ग जाएगा.

सोचिए, एक पादरी लोगों को मरने के लिए स्वर्ग का टिकट दे रहा है. उधर यूक्रेन में भी वही खेल है. यूक्रेन के चर्च ने खुद को रूसी चर्च से अलग कर लिया है और कहा है कि भगवान यूक्रेन के साथ है. अमेरिकी इवेंजेलिकल पादरी इस युद्ध को बाइबल की भविष्यवाणी बता कर हथियारों के लिए पैसा जुटा रहे हैं. एक ही जीसस, एक ही बाइबल, एक ही क्रॉस, लेकिन एक रूसी सैनिक को मारने का आशीर्वाद दे रहा है और दूसरा यूक्रेनी सैनिक की हत्या को पवित्र बता रहा है. अब सवाल यह है कि अगर भगवान सच में होता तो वो किस तरफ होता? वो अपना ही चर्च बम से उड़ते हुए देख कर क्या सोचता? असल में भगवान कहीं नहीं है, वहां सिर्फ सत्ता है जिसने धर्म को हथियार बना लिया है.

इस युद्ध के दौरान दुनिया के सारे मौलवी, पादरी, संत सब फेल हो गए. युद्ध रोकने के लिए दिन रात प्राथनाएं करते रहे और ऊपर से ईश्वर की कृपा की बजाये बम गिरते रहे. लोगों को धर्म ने नहीं बचाया बल्कि लोगों को रोटी रेड क्रॉस ने दी, दवा डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने दी, बच्चों को निकालने के लिए बसें संयुक्त राष्ट्र ने भेजीं. चर्च, मंदिर या मस्जिदों ने एक भी मिसाइल नहीं रोकी. धर्म ने सिर्फ लाशों पर प्रार्थना की. दोनों तरफ के सैनिकों की लाशों पर एक ही प्रार्थना और फिर कहा कि ये ईश्वर की मर्जी है.

कोई भी जमीन इतनी पवित्र नहीं है जिसके लिए 95 लाख लोगों को बेघर किया जाए. रूस को भी और यूक्रेन को भी अब समझ आ रहा है कि कोई मसीहा आसमान से नहीं उतरेगा. कोई चमत्कार नहीं होगा. युद्ध का अंत किसी भविष्यवाणी से नहीं, टेबल पर बैठ कर ही होगा और उस टेबल पर भगवान आकर नहीं बैठेगा, इंसान ही बैठेंगे इसलिए जब तक लोग ये मानते रहेंगे कि मेरा भगवान तेरे भगवान से बड़ा है और मेरी जमीन तेरी जमीन से ज्यादा पवित्र है तब तक हर बॉर्डर पर यूक्रेन जैसा ही मंजर रहेगा. Russia Ukraine War

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